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Tuesday, January 13, 2026

अब पंचायत नहीं सरकार तय करेगी रोजगार गारंटी योजना में होगा क्या काम, राज्य सरकारों पर बढ़ेगा बजट का बोझ- पूर्व शिक्षा मंत्री

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CG News: छत्तीसगढ़ के पूर्व शिक्षा मंत्री प्रेम साय सिंह ने NDA सरकार पर हमला बोला है. ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान के तहत जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अंबिकापुर में पूर्व मंत्री प्रेम साय सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के मूलभूत प्रावधानो को बदल दिया है. देश की आजादी के नायक महात्मा गांधी के नाम से रखे गए इस योजना का नाम बदल कर उसे विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन ग्रामीण किया गया. नई योजना में पहला हमला काम पाने की संवैधानिक गारंटी पर किया गया. नई योजना काम मांगने के अधिकार को समाप्त करता है. नई योजना ग्राम पंचायतों के काम देने के अधिकार को भी समाप्त करता है और केंद्र सरकार को मनमाने ढंग से कार्यों के आबंटन के लिये अधिकार संम्पन्न बनाता है.

अंबिकापुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में पूर्व मंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह ने कहा- ‘पहले देश की प्रत्येक ग्राम पंचायत को यह अधिकार था कि वो काम की मांग के आधार पर काम को स्वीकृति दे, लेकिन नए प्रावधान के माध्यम से अब मोदी सरकार तय करेगी कि कहां काम देना है और कहां नहीं. नए बदलावों में न्यूनतम मजदूरी की गारंटी समाप्त हो जायेगी और सरकार को मनमाने ढंग से मजदूरी तय करने का अधिकार होगा. मनरेगा के तहत गांवों में विकास कार्य और रोजगार नियोजित करने का अधिकार ग्राम पंचायतों को था, जो इस नई योजना में अब केन्द्र की सरकार तय करेगी कि क्या काम हो, कितना रोजगार हो. संभावना है कि ठेकेदारों के लिए प्रतिबंधित इस कार्य में अब ठेकेदारों को भी प्रवेश दिया जाएगा. सरकार ने जो महत्वपूर्ण बदलाव इस योजना में किया है वह है बजट का आवंटन है.’

‘राज्य सरकारों की आर्थिक हालत खस्ता है’

उन्होंने आगे कहा- ‘नई योजना के अनुसार अब व्यय को केन्द्र और राज्य सरकारों 60-40 के अनुपात में वहन करेंगी. देश की अधिकांश राज्य सरकारों की आर्थिक हालत खस्ता है. ऐसे में राज्य अतिरिक्त व्यय को वहन करने के बजाय इस योजना के क्रियान्वयन में अरुचि दिखाएंगs, जिससे ग्रामीण योजगार के पूर्णतः समाप्त हो जाने की संभावना है. ऐसे में रोजगार के दिनों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 125 करने का दावा जुमला साबित होगा. नई योजना फसल की अवधि में रोजगार को प्रतिबंधित करती है. इससे बड़ी संख्या में भूमिहीन काश्त मजदूर प्रभावित होंगे.’

‘मनरेगा उन्हें नापंसद है…’

पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह ने कहा कि मनरेगा को लेकर मोदी जी एवं भाजपा का दुराव जगजाहिर है. केन्द्र की सत्ता प्राप्त होने के पूर्व एवं उसके पश्चात भी उनके कई ऐसे बयान हैं, जो कि यह साबित करते हैं कि ग्रामीण भारत को रोजगार देने वाली मनरेगा उन्हें नापंसद है. मनरेगा हर उस व्यक्ति को नापंसद है जो कॉरपोरेट जगत की सरपरस्ती में जीता है. मनरेगा कॉरपोरेट जगत को सस्तें मजदूर उपलब्ध कराने में बाधा उत्पन्न करता है. पूरी की पूरी मोदी सरकार और उसका 11 साल का कार्यकाल चंद कारपोरेट के लिये समर्पित रही है और मनरेगा पर इस सरकार का यह कुठाराघात भी कारपोरेट समर्पित नितियों का परिणाम है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह मांग करती है कि सरकार न केवल मनरेगा को बहाल करे. साथ ही साथ न्यूनतम मजदूरी की दर 400 रुपए प्रति कार्य दिवस करे. सरकार काम के सवैधानिक गारंटी के साथ ही काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी भी दे.

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