Ashok Chakra Award: गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री IAF ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. शुभांशु शुक्ला वीरता पुरस्कार पाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं. उनकी कामयाबी की उड़ान चारों तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है. राष्ट्रपति से सम्मानित होते देख पत्नी खुशी से मुस्कुराने लगीं.
भारत में कई ऐसे अचीवर्स हैं, जिन्होंने दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है. लेकिन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में जाकर भारत का परचम लहराया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस से एक दिन पूर्व यानी 25 जनवरी को ही बहादुर IAF अधिकारी से अंतरिक्ष यात्री बने शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र देने की मंजूरी दी थी. आज उन्हें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अशोक चक्र से सम्मानित किया है.
17 साल की उम्र में की थी करियर की शुरुआत
- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला मूलत: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए परिजनों को बिना बताए, एक दोस्त से फॉर्म लेकर नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के लिए अप्लाई किया था.
- शुभांशु कारगिल युद्ध और IAF एयर शो से काफी प्रभावित हुए थे, जिसकी वजह से उन्होंने इस क्षेत्र में अपना करियर चुना. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 17 साल की उम्र से ही कर दी थी.
डेंटिस्ट हैं शुभांशु की पत्नी कामना
आज जब शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया तो उनकी पत्नी डॉक्टर कामना शुक्ला खुशी से मुस्कुराने लगीं. डॉक्टर कामना शुक्ला पेशे से डेंटिस्ट हैं. शुभांशु और कामना दोनों लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल से पढ़े हैं. इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी थीं. इसके बाद वर्ष 2009 में दोनों ने शादी कर ली. शुभांशु शुक्ला मिग-21, MiG-29, सुखोई 30 MKI, जगुआर जैसे फाइटर जेट उड़ा चुके हैं.








