Cyber Fraud: सरकार ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए एक नई और गंभीर चेतावनी जारी की है. इस चेतावनी में बताया गया है कि साइबर अपराधी फर्जी पहचान और गलत उम्र का सहारा लेकर खासतौर पर बच्चों से संपर्क कर रहे हैं.
धीरे-धीरे भरोसा जीतने के बाद ये लोग बच्चों से निजी बातचीत शुरू करते हैं और फिर तस्वीरें या वीडियो साझा करने के लिए उकसाते हैं. बाद में इन्हीं चीजों का गलत इस्तेमाल कर बच्चों को मानसिक दबाव में डाला जाता है. इस खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा इकाई I4C ने लोगों को सतर्क रहने को कहा है.
I4C के मुताबिक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैकर्स पहले दोस्ती का नाटक करते हैं. वे खुद को हमउम्र या भरोसेमंद व्यक्ति बताकर बातचीत आगे बढ़ाते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि उनकी बातें पूरी तरह गोपनीय रहेंगी. इसी बहाने वे निजी जानकारी, फोटो या वीडियो हासिल कर लेते हैं. एक बार यह सामग्री उनके हाथ लग जाती है तो वे बच्चों को ब्लैकमेल करने लगते हैं और चुप रहने का दबाव बनाते हैं.
सरकार ने खासतौर पर माता-पिता को सावधान रहने की सलाह दी है. बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि वे इंटरनेट पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ निजी तस्वीरें, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें. अगर कोई ऑनलाइन बातचीत के दौरान सीक्रेट रखने की बात करे या असहज महसूस कराए तो ऐसे अकाउंट को तुरंत ब्लॉक करना चाहिए. इसके साथ ही बच्चों को यह भी बताया जाए कि अपनी उम्र, स्कूल, पता या मोबाइल नंबर जैसी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करना जोखिम भरा हो सकता है.
I4C ने यह भी कहा है कि अगर किसी बच्चे को ऑनलाइन किसी तरह की परेशानी, डर या दबाव महसूस हो, तो उसे बिना झिझक किसी भरोसेमंद बड़े को बताना चाहिए. चुप रहना समस्या को और बढ़ा सकता है. साइबर अपराधी अक्सर बच्चों को भावनात्मक रूप से कमजोर बनाकर उन्हें फंसाने की कोशिश करते हैं इसलिए समय पर बातचीत और सही मार्गदर्शन बेहद जरूरी है.
अगर किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि सामने आए तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है. सरकार का साफ कहना है कि जागरूकता और समय पर कार्रवाई ही ऐसे ऑनलाइन खतरों से बचाव का सबसे मजबूत तरीका है.







