कंबोडिया और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा और राजनीतिक तनाव को कम करने की दिशा में एक नया शांति समझौता सामने आया है। दोनों देशों ने संघर्षविराम (Ceasefire) पर सहमति जताते हुए आपसी बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से विवाद सुलझाने का भरोसा दिया है। इस समझौते के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
इस शांति प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिलचस्पी देखी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, ट्रंप की प्रत्यक्ष भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिका की कूटनीतिक पहल और बैक-चैनल संवाद ने दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई हो सकती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से अहम है, क्योंकि इससे न सिर्फ सीमा पर तनाव कम होगा बल्कि आर्थिक और व्यापारिक सहयोग के रास्ते भी खुल सकते हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस सीजफायर को कितना प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और इसमें वैश्विक शक्तियों, खासकर अमेरिका, की भूमिका कितनी निर्णायक साबित होती है।








