महाराष्ट्र के अकोला ज़िले में ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से सूखी और बंजर ज़मीन पर 2200 से अधिक नीम के पेड़ लगाए। इस पहल ने केवल 4 वर्षों में चमत्कारिक बदलाव ला दिया—भूमिगत जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे कुएँ और बोरवेल फिर से पानी देने लगे। पेड़ों की छाया और वाष्पोत्सर्जन के कारण आसपास का तापमान लगभग 2° घट गया, जिससे गर्मियों की तपिश कम महसूस होने लगी। नीम की पत्तियों ने हवा को शुद्ध किया, धूल और प्रदूषक कणों को रोका, और वातावरण में ताज़गी लौट आई।
धीरे-धीरे गाँव की सूखी ज़मीन हरियाली से भर गई, खेतों में जीवन लौट आया और लोग फिर से प्रकृति के साथ संतुलन में जीने लगे। यह उदाहरण दिखाता है कि सामूहिक संकल्प और वृक्षारोपण जैसी साधारण पहल भी पर्यावरण और समाज दोनों को गहराई से बदल सकती है।







