28.1 C
Raipur
Tuesday, January 27, 2026
- Advertisement -

ये कैंसर चुपचाप करता है हमला, शुरुआती लक्षण न मिले तो जान पर बन सकता है खतरा

Must read

आमतौर पर हम किसी भी गंभीर बीमारी को दर्द, तेज तकलीफ या अचानक बिगड़ती हालत से जोड़कर देखते हैं. हमें लगता है कि जब शरीर में कुछ गड़बड़ होगी, तो शरीर खुद हमें चेतावनी दे देगा. लेकिन कैंसर के कई प्रकार ऐसे होते हैं जो इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर देते हैं. ये कैंसर सालों तक शरीर के अंदर बिलकुल खामोशी से बढ़ते रहते हैं.
न तेज दर्द, न कोई बड़ा लक्षण, न ऐसा कुछ जो इंसान को तुरंत डॉक्टर के पास जाने पर मजबूर करे और जब तक इनके लक्षण साफ तौर पर सामने आते हैं, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है. कैंसर का सबसे खतरनाक रूप उसकी तेजी नहीं, बल्कि उसकी चुप्पी होती है.कई बार कैंसर शरीर में मौजूद रहता है, लेकिन मरीज और डॉक्टर दोनों को इसका अंदाजा नहीं लग पाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन से कैंसर बहुत ही साइलेंटली अपना शिकार बनाते हैं.

कौन से कैंसर बहुत ही साइलेंटली अपना शिकार बनाते हैं 

1. डिम्बग्रंथि का कैंसर – डिम्बग्रंथि का कैंसर लंबे समय से साइलेंट किलर माना जाता है. इस कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के और भ्रमित करने वाले होते हैं, जैसे पेट का थोड़ा फूलना, जल्दी पेट भर जाना, नीचे पेट या श्रोणि में हल्की-सी बेचैनी. ज्यादातर महिलाएं इन लक्षणों को गैस, अपच या सामान्य पीरियड्स की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं.इसी वजह से लगभग दो-तिहाई मामलों में ओवरी कैंसर का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चलता है, जब बीमारी पेट में फैल चुकी होती है.
2. पैंक्रियाज का कैंसर – अगर सबसे ज्यादा जानलेवा साइलेंट कैंसर की बात करें, तो पैंक्रियाज का कैंसर सबसे ऊपर आता है. सिर्फ 15 प्रतिशत से कम मामलों में ही यह कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ा जाता है. ज्यादातर मरीज तब आते हैं जब कैंसर फैल चुका होता है. इसके शुरुआत में न दर्द होता है, न पीलिया, न कोई गंभीर पाचन समस्या होती है. जब लक्षण आते हैं, जैसे तेज दर्द, वजन कम होना या पीलिया तब तक सर्जरी का मौका निकल चुका होता है. इसी कारण यह कैंसर बहुत कम मामलों में ठीक हो पाता है.
3.  फेफड़ों का कैंसर – फेफड़ों का कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है, फिर भी यह भी अक्सर चुपचाप बढ़ता है.  इसके शुरुआती लक्षण हल्की लेकिन लंबे समय तक रहने वाली खांसी, थोड़ी-सी सांस फूलना, लगातार थकान, धूम्रपान करने वाले लोग इन लक्षणों को नॉर्मल समझ लेते हैं. परिवार वाले भी ज्यादा  गंभीरता नहीं दिखाते. नतीजा यह होता है कि लगभग 70 प्रतिशत मरीज तीसरे या चौथे स्टेज में डॉक्टर के पास पहुंचते हैं.
4. कोलोरेक्टल का कैंसर – आंतों का कैंसर लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के रह सकता है. इसके शुरुआती संकेत बहुत मामूली होते हैं. जैसे मल में थोड़ा सा खून (जो दिखता नहीं), आयरन की कमी से खून की कमी, शौच की आदतों में हल्का बदलाव. लोग इन्हें बवासीर, कमजोरी या उम्र का असर मान लेते हैं. जबकि सच यह है कि समय पर जांच हो जाए तो यह कैंसर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.
5. ब्रेस्ट कैंसर – भारत में ब्रेस्ट कैंसर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके शुरुआती चरण में दर्द नहीं होता है. अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि दर्द नहीं है, तो कुछ गंभीर नहीं होगा.  लेकिन  भारत में लगभग आधे मरीज उन्नत स्टेज में आते हैं. 8–10 प्रतिशत मरीजों में तो कैंसर पहले से शरीर में फैल चुका होता है. गांठ, स्किन में बदलाव या निप्पल से डिस्चार्ज को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
6. गॉलब्लैडर का कैंसर – उत्तर भारत में गॉलब्लैडर का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है. शुरुआत में इसके लक्षण पित्त की पथरी, हल्का पेट दर्द, अपच जैसे लगते हैं. मरीज और कई बार डॉक्टर भी इसे सामान्य पथरी समझ लेते हैं. जब पीलिया या तेज दर्द होता है, तब तक 70–80 प्रतिशत मामलों में कैंसर काफी फैल चुका होता है.

More articles

Latest article