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कैंसर मामले में चीन-अमेरिका के बाद तीसरे नंबर पर भारत

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लाइफस्टाइल: कैंसर एक बेहद खतरनाक बीमारी है. ग्लोबल कैंसर ऑब्जरवेटरी (Globocan) के अनुसार, दुनिया में हर साल 1.90 करोड़ लोग कैंसर की चपेट में आते हैं. चीन-अमेरिका के बाद तीसरे नंबर पर भारत है. WHO के अनुसार, दुनिया में हर साल करीब 1 करोड़ लोग कैंसर से अपनी जान गंवा देते हैं. साल 2010 की तुलना में 2019 में करीब 21% ज्यादा मौतें कैंसर की वजह से हुईं.हालांकि, अगर समय पर कैंसर की पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है. लेकिन कैंसर की कोशिकाओं को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता है. शरीर में इसके खतरनाक सेल्स बचे रहते हैं. आइए जानते हैं इसका कारण और कारगर इलाज के बारें में.

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कैंसर, कोशिकाओं (Cells) के असामान्य तरीके से बढ़ने से होता है. दरअसल, हमारे शरीर में कोशिकाएं एक पैटर्न से बढ़ती हैं और एक समय बाद खुद ही मर जाती हैं. इन मृत कोशिकाओं की जगह नई और हेल्दी कोशिकाएं आ जाती हैं लेकिन जब कैंसर होता है, तो सेल्स का कंट्रोलिंग इफेक्ट ही खत्म हो जाता है, जिससे वे अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं.

कैंसर किस जगह हुआ है और कितना ज्यादा बढ़ चुका है, इसके आधार पर इसे चार स्टेज में बांटा गया है. इलाज का तरीका भी उसी हिसाब से होता है. इस बीमारी का पता जितनी जल्दी चलेगा, ठीक होने की संभावना भी उतनी ही ज्यादा होती है. हालांकि, कई बार कैंसर का इलाज करने के बाद भी इसकी कोशिकाएं शरीर में बची रह सकती है और फिर से उभर सकती है. ऐसा इसलिए, क्योंकि इन्हें पूरी तरह खत्म करना बहुत मुश्किल है. इलाज के बावजूद शरीर में क्यों बच जाती हैं कैंसर सेल्स कैंसर के सेल शरीर में बचे रहते हैं, क्योंकि ये सेल्स बहुत तेजी से बढ़ते हैं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इन्हें पहचान नहीं पाती है. ये सेल शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं, जैसे ब्लड, ब्रेन, बोन आदि. जब कैंसर का इलाज किया जाता है, तो इन सेल्स को खत्म करने की कोशिश की जाती है, लेकिन कुछ सेल बचे रह सकते हैं

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