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इसी स्थान पर हुई रामायण कथा की रचना, लव-कुश ने ​सीखा था शस्त्र चलाना…

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रामायण हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में से एक है. महर्षि वाल्मिकी को संस्कृत का प्रथम कवि यानि संस्कृत भाषा का प्रथम कवि माना जाता है. महाकाव्य रामायण में 24,000 श्लोक और उत्तरकांड सहित 7 कांड हैं.

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वाल्मिकी जयंती के मौके पर हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बता रहे हैं. मान्यता के अनुसार यहीं पर वाल्मिकी जी ने रामायण लिखी थी.

अमृतसर में श्रीराम तीरथ मंदिर भगवान राम को समर्पित है. यहां वाल्मिकीजी की 8 फीट ऊंची सोने से बनी प्रतिमा स्थापित की गई है. ऐसा माना जाता है कि भगवान राम द्वारा माता जानकी को त्यागने के बाद वाल्मिकीजी ने सीताजी को इसी स्थान पर अपने आश्रम में आश्रय दिया था. लव और कुश का जन्म यहीं हुआ था. महर्षि वाल्मिकी ने रामायण की रचना भी यहीं की थी. इसी आश्रम में उन्होंने लव और कुश को हथियार चलाना भी सिखाया. श्री राम तीर्थ मंदिर भगवान श्री राम और माता जानकी को समर्पित एक धार्मिक स्थान है.

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लव-कुश के जन्म के बाद जब श्रीराम ने अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया और घोड़े को यात्रा के लिए छोड़ा, तो दोनों भाइयों ने इसी स्थान पर श्री राम का घोड़ा पकड़ा था. इस धाम से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि इस मंदिर के पास स्थित झील को हनुमानजी ने खुदवाया था और माता जानकी इसी झील के पास बनी सीढ़ियों में स्नान करती थीं. यही कारण है कि यह झील अब बहुत पवित्र मानी जाती है और श्रद्धालु यहां स्नान करने के बाद झील की परिक्रमा भी करते हैं.

इस मंदिर में सीता-राम मिलाप मंदिर है, जहां भगवान राम और माता सीता का पुनः मिलन हुआ और फिर माता जानकी ने धरती की गोद में प्राण त्याग दिये. इस धाम के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. इसके अलावा मंदिर के पास श्री रामचन्द्र मंदिर, जगन्नाथपुरी मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, सीता मंदिर, सीताजी की कुटिया, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के भी दर्शन किये जा सकते हैं.

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