बेंगलुरु: योग और अध्यात्म की आड़ में वर्षों से महिलाओं का शोषण करने वाले योग गुरु निरंजन मूर्ति को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के पीछे एक 17 साल की साहसी लड़की की भूमिका रही, जिसने न सिर्फ अपनी आपबीती सुनाई बल्कि अन्य पीड़िताओं को भी आगे आने की हिम्मत दी।
17 वर्षीय लड़की की हिम्मत से खुला मामला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, योग गुरु निरंजन मूर्ति महिलाओं को अपने योग केंद्र में आकर्षित करता और फिर उन्हें शारीरिक शोषण का शिकार बनाता था। उसकी इस करतूत का पर्दाफाश तब हुआ जब 17 साल की एक लड़की ने उसके खिलाफ आवाज उठाई। उसने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई और बताया कि वह अकेली पीड़िता नहीं है।
आठ महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप
लड़की की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे अन्य पीड़िताएं भी सामने आईं। अब तक कुल आठ महिलाओं ने निरंजन मूर्ति पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। पीड़िताओं का कहना है कि आरोपी उन्हें योग और ध्यान सिखाने के बहाने बुलाता था और फिर मजबूरी का फायदा उठाकर उनका शोषण करता था।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बाद छानबीन तेज कर दी और सबूत जुटाने के बाद योग गुरु को हिरासत में ले लिया। उसे अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे पुलिस रिमांड में भेज दिया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं और भी महिलाएं इस घिनौनी हरकत का शिकार तो नहीं हुईं।
समाज में गुस्सा और नाराजगी
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर गुस्सा देखा जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि अध्यात्म और योग के नाम पर इस तरह का शोषण पूरे समाज के लिए शर्मनाक है। कई लोग यह भी मांग कर रहे हैं कि आरोपी को सख्त से सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई और ऐसा करने की हिम्मत न कर सके।
सबक: चुप्पी तोड़ना जरूरी
यह मामला एक बड़ी सीख देता है कि अगर कोई व्यक्ति गलत तरीके से शक्ति या पद का इस्तेमाल कर रहा है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना बेहद जरूरी है। खासकर महिलाओं के लिए, यह घटना बताती है कि चुप्पी साधने से अपराधी और मजबूत होता है।








