Raghopur Election: बिहार विधानसभा चुनावों का माहौल गर्माने लगा है और सभी की नजरें अब राघोपुर सीट पर टिकी हैं, जहां से राजद नेता तेजस्वी यादव चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं। यह सीट कभी लालू प्रसाद यादव का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन अब मुकाबला पहले जितना आसान नहीं दिख रहा। तेजस्वी यादव के सामने इस बार तीसरी बार जीत दर्ज करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
Raghopur विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनावों में तेजस्वी यादव ने मजबूत प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार एनडीए और जदयू की रणनीति ने समीकरण बदल दिए हैं। विरोधी दल इस सीट को किसी भी कीमत पर जीतना चाहते हैं ताकि राजद के “परिवारिक गढ़” को कमजोर किया जा सके।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय मुद्दे, बेरोजगारी, महंगाई और विकास कार्यों की धीमी गति इस चुनाव में बड़ा रोल निभा सकते हैं। तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती है जनता का भरोसा दोबारा जीतना। राघोपुर के ग्रामीण इलाकों में लोग अब रोजगार और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्षी उम्मीदवारों ने स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क अभियान को तेज कर दिया है और युवाओं में बेरोजगारी को लेकर नाराजगी को भुनाने की कोशिश में हैं। एनडीए के नेता इस सीट को “प्रेस्टिज बैटल” मानकर पूरी ताकत झोंक रहे हैं।हालांकि, तेजस्वी यादव ने भी चुनावी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी है। वे लगातार जनसभाएं कर रहे हैं और जनता से वादा कर रहे हैं कि राघोपुर को विकास का मॉडल बनाया जाएगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि इस बार जनता “विकास बनाम वादों” के आधार पर वोट करने का मन बना रही है।








