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Saturday, November 29, 2025

India-Bahrain Relations: S. Jaishankar ने बहरीन के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने पर दिया जोर, 5वीं हाई जॉइंट कमीशन मीटिंग में हुए अहम समझौते

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भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने बहरीन के साथ आर्थिक सहयोग, व्यापारिक संबंधों और निवेश को और मजबूत करने पर जोर दिया है। यह बयान उन्होंने 5वीं भारत-बहरीन हाई जॉइंट कमीशन मीटिंग के दौरान दिया, जहां दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मीटिंग में भारत ने बहरीन को ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश के नए अवसरों का आमंत्रण दिया।

भारत-बहरीन व्यापारिक रिश्तों में दिखी स्थिर वृद्धि

विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और बहरीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार में स्थिर और सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1.6 अरब डॉलर का है, और आने वाले वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि बहरीन पश्चिम एशिया में भारत का एक रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के संबंध “विश्वास और पारस्परिक विकास” पर आधारित हैं।

ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र पर फोकस

मीटिंग के दौरान भारत ने ग्रीन एनर्जी, पेट्रोलियम, और नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दिया। साथ ही, दोनों देशों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, पोर्ट कनेक्टिविटी और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत की “मेक इन इंडिया” और “मेक फॉर द वर्ल्ड” पहल बहरीन के लिए निवेश के बड़े अवसर लेकर आ सकती है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और टेक्नोलॉजी में नए समझौते

दोनों देशों ने शिक्षा, हेल्थकेयर, साइबर सिक्योरिटी और फिनटेक सेक्टर में नई साझेदारियों की घोषणा की। भारत की आईटी कंपनियों और बहरीन के टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक डिजिटल इनोवेशन प्लेटफॉर्म स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।

जयशंकर का बयान

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा,

“भारत और बहरीन के रिश्ते सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों पर भी आधारित हैं। हमारा लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच निवेश और रोजगार के अवसरों को नई ऊंचाई पर ले जाया जाए।”

भारत की कूटनीति में पश्चिम एशिया की अहम भूमिका

भारत के लिए पश्चिम एशिया का एक प्रमुख सहयोगी देश है। ऊर्जा आपूर्ति, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच साझेदारी अहम मानी जाती है। भारत की “वेस्ट एशिया आउटरिच पॉलिसी” के तहत यह बैठक क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम मानी जा रही है।

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