अयोध्या में रामलला के दैनिक श्रृंगार को लेकर नई जानकारी सामने आई है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि रामलला को सप्ताह के हर दिन अलग-अलग रंगों के परिधान पहनाए जाते हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, बल्कि भक्तों की आस्था और आकर्षण का भी केंद्र बनी हुई है। शृंगार व्यवस्था के अनुसार —सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को गुलाबी, शनिवार को नीला, और रविवार को केसरिया परिधान पहनाए जाते हैं। रंगों की यह विविधता भगवान राम के शांत, तेजस्वी और करुणामयी स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती है। मंदिर के कपड़ा विभाग द्वारा विशेष रूप से बनाए गए ये परिधान महीन कपड़ों और पारंपरिक कढ़ाई से सुसज्जित होते हैं।
सर्दी के मौसम में रामलला के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। ठंड से बचाने के लिए रामलला को कश्मीर की उच्च गुणवत्ता वाली पश्मीना शालें ओढ़ाई जाएंगी। यह पश्मीना हात करघा तकनीक से बनी है और विशेष रूप से मंदिर शृंगार के लिए भेजी गई है।मंदिर प्रशासन ने बताया कि सर्दियों के दौरान रामलला के गर्म वस्त्रों में ऊनी कुर्ता, दुपट्टा, ओढ़नी और मुलायम पादुकाएं भी शामिल होंगी। भक्तों के अनुसार यह व्यवस्था भगवान के प्रति प्रेम, सेवा और समर्पण का प्रतीक है। रामलला के नित्य-शृंगार को देखने के लिए सुबह-सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। अक्सर भक्त विभिन्न रंगों के परिधानों को देखने के लिए विशेष दिनों पर भीड़ लगाते हैं।मंदिर से जुड़े पुजारियों का कहना है कि यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे और भी व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।अयोध्या में रामलला का यह विशेष शृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है, और सर्दियों में पश्मीना ओढ़ने की तैयारी ने श्रद्धालुओं के उत्साह को और बढ़ा दिया है।








