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Friday, February 13, 2026
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Highway Bomb Recovery: नक्सलियों का खौफनाक प्लान फेल, स्टेट हाईवे 63 पर 30 किलो IED बरामद

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Highway Bomb Recovery: देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त बनाने की डेडलाइन नजदीक है. सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से नक्सली बैकफुट पर हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक बार फिर उनकी बड़ी साजिश सामने आई है. सुरक्षाबलों ने स्टेट हाईवे 63 और आंतरिक मार्गों पर लगाए गए IED बरामद कर नष्ट कर दिए. साथ ही माओवादी स्मारकों को भी ध्वस्त कर बड़ा संदेश दिया गया है.

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आवापल्ली-मुरदण्डा मार्ग पर 30 किलो IED डिटेक्ट

12 फरवरी को थाना आवापल्ली क्षेत्र में थाना पुलिस, सीआरपीएफ 196वीं और 170वीं वाहिनी की संयुक्त टीम डिमाइनिंग ड्यूटी पर निकली थी. आवापल्ली-मुरदण्डा सड़क मार्ग पर मुरदण्डा कैंप से करीब 3 किमी दूर मुख्य मार्ग किनारे संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी. बी.डी. टीम ने जांच के दौरान सड़क के किनारे फॉक्सहोल बनाकर करीब 5 फीट अंदर और सड़क से लगभग 2 फीट नीचे प्लांट किया गया करीब 30 किलो का IED बरामद किया.

प्राथमिक जांच में सामने आया कि स्विच सिस्टम के जरिए बड़े वाहनों को निशाना बनाने की तैयारी थी. अधिक गहराई में प्लांट होने के कारण मौके पर ही नियंत्रित विस्फोट कर IED नष्ट किया गया. विस्फोट के बाद सड़क पर गहरा गड्ढा बन गया था, जिसे भरकर यातायात बहाल कर दिया गया.

गंगालूर में 5 किलो का प्रेशर IED नष्ट

इसी दिन थाना गंगालूर क्षेत्र के FOB डोडीतुमनार इलाके में सीआरपीएफ 153वीं वाहिनी की टीम ने डिमाइनिंग के दौरान करीब 5 किलो का प्रेशर IED डिटेक्ट किया. सुरक्षाबलों ने तत्परता दिखाते हुए उसे मौके पर ही सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया.

कुटरू और गंगालूर में माओवादी स्मारक ध्वस्त

थाना कुटरू क्षेत्र में कोबरा 210 वाहिनी ने माओवादी विरोधी अभियान के तहत इन्द्रावती नदी किनारे बनाए गए माओवादी स्मारक को चिन्हित कर पूरी तरह ध्वस्त किया. यह स्मारक वर्ष 2025 में मारे गए कुख्यात माओवादी कमांडर सीसीएम बसवराजू की स्मृति में बनाया गया था. वहीं थाना गंगालूर क्षेत्र में सीआरपीएफ 222वीं वाहिनी ने तोड़का-कोरचोली और पेद्दाकोरमा के घने जंगलों में सर्चिंग और एरिया डॉमिनेशन के दौरान अन्य माओवादी स्मारकों को भी नष्ट किया.

माओवादी नेटवर्क पर मनोवैज्ञानिक प्रहार

सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई को माओवादी नेटवर्क पर बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रहार माना जा रहा है. IED साजिश नाकाम होने से संभावित बड़ा नुकसान टल गया. साथ ही प्रतीकात्मक ढांचे ध्वस्त कर स्पष्ट संदेश दिया गया है कि क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों और अवैध संरचनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है.

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