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Monday, February 16, 2026
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Hammer Missile hogi Made in India: ऑपरेशन सिंदूर में आतंकियों का खौफ बनी ‘हैमर’ मिसाइल अब भारत में तैयार, जानें इसकी ताकत

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Hammer Missile hogi Made in India: 114 राफेल विमानों के बाद भारत और फ्रांस के बीच एक और बड़ा रक्षा सौदा होने जा रहा है. भारत ने राफेल में इस्तेमाल होने वाली हैमर मिसाइल के लिए डील की है. दिलचस्प बात यह है कि इस मिसाइल का निर्माण अब भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए जल्द ही समझौता (MoU) साइन हो सकता है. 17 फरवरी को फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगी. दोनों नेता बेंगलुरु में होने वाली छठी भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता में शामिल होंगे. इस बैठक में पुराने रक्षा समझौते को 10 साल और बढ़ाया जा सकता है. साथ ही भारत में HAMMER मिसाइल के निर्माण को लेकर एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ेंगे.

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दुश्मनों का काल है हैमर

हैमर शब्द का मतलब ‘हथौड़ा’ होता है. जिस तरह हथौड़े का वार किसी सतह को समतल कर देता है, उसी तरह यह हथियार अपने लक्ष्य को पूरी तरह ध्वस्त करने की क्षमता रखता है. रफाल विमान में लगने वाली यह मिसाइल पहले फ्रांस से आयात की जाती थी, लेकिन नए समझौते के बाद इसका निर्माण भारत में होगा. यह एक स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड बम है, जो हवा से जमीन पर सटीक हमला करता है. इसकी मारक क्षमता लगभग 60–70 किलोमीटर तक है. पहाड़ी इलाकों और मजबूत बंकरों पर भी यह असरदार साबित हुई है. भारत में निर्माण होने से वायुसेना को तेजी से आपूर्ति मिलेगी, विदेशी निर्भरता कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा.

इस मिसाइल को पहली बार 2007 में पेरिस एयर शो में पेश किया गया था. उस समय इसका नाम AASM (Armement Air-Sol Modulaire) था. 2011 में इसका नाम बदलकर HAMMER (Highly Agile Modular Munition Extended Range) कर दिया गया. यह मीडियम रेंज की हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है.

हैमर मिसाइल की प्रमुख खासियत

  • इसका वजन लगभग 330 किलोग्राम होता है.
  • ऊंचे इलाकों में यह 60 किलोमीटर दूर तक सटीक निशाना साध सकती है.
  • फायर एंड फॉरगेट: एक बार लक्ष्य तय कर मिसाइल दागने के बाद सटीकता की चिंता नहीं करनी पड़ती.
  • यह स्थिर और गतिशील, दोनों तरह के लक्ष्यों को भेद सकती है.
  • इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगा है, जो निशाना चूकने की संभावना को बेहद कम करता है.
  • 125 किलोग्राम से लेकर 1000 किलोग्राम तक के विभिन्न वॉरहेड विकल्प उपलब्ध हैं.
  • किसी भी मौसम में, दिन या रात,हर समय उपयोग किया जा सकता है.
  • एक रफाल विमान में 250 किलोग्राम की छह हैमर मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जो एक साथ छह अलग-अलग ठिकानों को निशाना बना सकती हैं.

मीटिंग में रफाल पर भी जोर

संभावना है कि इस वार्ता में 114 राफेल विमानों की डील पर भी चर्चा होगी. इनमें से 96 विमान भारत में बनाए जाएंगे, जबकि बाकी तैयार हालत में आएंगे. इनकी डिलीवरी की जिम्मेदारी फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation संभालेगी. राफेल का इंजन बनाने वाली Safran पहले से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ काम कर रही है. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर्नाटक के वेमगल में हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन करने वाले हैं. यह प्रोजेक्ट टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और Airbus का संयुक्त उपक्रम है, जहां H-125 हेलीकॉप्टर बनाए जाएंगे. इन सभी समझौतों से स्पष्ट है कि भारत-फ्रांस की रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है. भारत का जोर स्वदेशी निर्माण पर है, ताकि भविष्य में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके.

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