Anti Naxal Operation: छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्ति की घोषणा हुए 29 दिन हो गए हैं. दरअसल, छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है. गिनती के बचे नक्सली भी आत्मसमर्पण कर रहे हैं, लेकिन जंगलों में मौजूद उनके दंश आज भी जीवित है. कांकेर जिले के जंगल से ऐसे ही 7 कुकर आईईडी बम मिलने से यह साफ हो गया है कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद अब जमीन में गड़े बारूदों की सफाई जवानों के लिए बड़ी चुनौती है. उत्तर बस्तर यानी कांकेर की बात करें, तो यहां गिनती के नक्सली बचे हुए हैं, जिनकी संख्या लगभग 4 से 5 हैं. डिवीसीएम चंदर अब भी जंगल में मौजदू हैं, जिसकी तलाश में जवान जंगलों की खाक छानकर नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने में जुटे हुए हैं.
इसी दौरान जवानों की टीम बड़ेधौसा, मानकोट, ऊपरकोटगांव, जीवलामरी के जंगल में सर्चिंग पर निकले थे. सर्चिंग के दौरान जवानों को 5-5 किलो के 7 कुकर आईईडी बम, 2 पाइप बम, एक कोडेक्स वायर, 3 बंडल वर्दी का कपड़ा, 7 बंडल बिजली वायर व अन्य नक्सल सामग्री बरामद की गई है. इसके बाद बरामद विस्फोटक सामग्रियों को बीडीएस टीम के मदद से सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए मौके पर ही नष्ट कर दिया गया. टीम में डीआरजी, जिला पुलिस बल, बीएसएफ और बीडीएस की टीम शामिल रही. यह सभी वह आईईडी बम हैं, जिन्हें नक्सलियों ने अपनी सुरक्षा और जवानों को नुकसान पहुंचाने की नियत से लगा रखा था.
लेकिन जब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है, तो इलाके की सर्चिंग में जवानों को जिले के विभिन्न इलाकों से नक्सलियों की ओर से लगाए गए आईईडी बम बरामद हो रहे हैं. ऐसे में इस तरह की और भी आईईडी को रिकवर कर सुरक्षित नष्ट करना जवानों के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि नक्सलियों के समाप्त होने के बाद जंगलों में वनोपज सहित अन्य चीजों के संग्रहण करने जाने वाले आम ग्रामीणों के लिया यह बड़ा खतरा हो सकता है. उन्हें कभी भी नुकसान हो सकता है. दरअसल, यहां नक्सलियों की समाप्ति के बाद जमीन में दफन बारूद अब भी चुनौती बने हुए हैं.




