रायपुर : बंगाली समाज छत्तीसगढ़ ने गर्वपूर्वक अपनी 5-दिवसीय बाल संस्कार पाठशाला का उद्घाटन किया, जो 20 मई से 24 मई तक आयोजित होगी। इस विशेष पहल का उद्देश्य बच्चों में सांस्कृतिक मूल्यों, नेतृत्व के आदर्शों और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना था। रायपुर के विभिन्न क्षेत्रों से आए 35 से अधिक विद्यार्थियों (कक्षा 1 से 7 तक) ने इसमें भाग लिया।
पाठशाला के दौरान बच्चों को महान नेताओं के जीवन और हमारी संस्कृति जैसे विषयों पर प्रेरणादायी सत्र प्रदान किए जायंगे। समाज के वरिष्ठ सदस्यों और विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे बच्चों को अनुशासन, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक गौरव के महत्व को समझने का अवसर मिला। प्रतिदिन बच्चों और उपस्थित जनों को स्वस्थ नाश्ता वितरित किया जाएगा, जिससे पोषण और स्वास्थ्य का महत्व और भी मजबूत हुआ।
आयोजकों की बातें
> “हमारा उद्देश्य बच्चों के मन में ऐसे मूल्य स्थापित करना है जो जीवनभर उनका मार्गदर्शन करें। बाल संस्कार पाठशाला केवल शिक्षा नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक गर्व का माध्यम है,” – श्री प्रथिभू बनर्जी, पाठशाला के डिज़ाइनर।
> “माता-पिता, अभिभावकों और समाज के सदस्यों से मिले सहयोग ने हमें अभिभूत कर दिया है। मिलकर हम बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रहे हैं,” – श्री रंजन बनर्जी, वरिष्ठ सदस्य।
विशेष आभार
इस कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले सभी सदस्यों का हार्दिक धन्यवाद:
श्री रंजन बनर्जी, श्री प्रथिभू बनर्जी, श्री संजय राय, श्रीमती बबली दत्ता बनिक, श्री अमियो कुमार पाल, श्री संजय चक्रवर्ती, श्री तनमय चटर्जी, श्री पार्थो सरकार, श्री दीप्तेश चटर्जी, श्री देबाशीष बोस, श्रीमती मीता बोस, श्री अमर विश्वास, श्रीमती महुआ मजूमदार, श्री जयंती बराई, श्री तरुण भौमिक, श्री सौम्यकांत बनर्जी, डॉ. कुशल चक्रवर्ती, डॉ. अपार्थ विश्वास, डॉ. दीपांजन विश्वास, श्री अहिने पाल, श्री देबाशीष रायचौधरी, श्री प्रेमांशु डे, श्री मधुसूदन मंडल, श्री रंजल पाल और श्री बिक्रमादित्य बोस।
साथ ही, बंगाली कालीबाड़ी प्रबंधन का विशेष आभार।
उज्ज्वल भविष्य की ओर
बाल संस्कार पाठशाला जैसी पहल के माध्यम से बंगाली समाज छत्तीसगढ़ बच्चों के सर्वांगीण विकास और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।




