CGSSB Recruitment: छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अहम खबर है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए चयन प्रक्रिया में डिजिटल वेरिफिकेशन को मजबूत करने की तैयारी की है। नई व्यवस्था के तहत आवेदन करने से लेकर परीक्षा केंद्र पर प्रवेश और नौकरी जॉइन करने तक अभ्यर्थी की पहचान का अलग-अलग चरणों में सत्यापन किया जाएगा।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य परीक्षा में किसी दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर बैठने, फर्जी पहचान और सॉल्वर गैंग जैसी गड़बड़ियों को रोकना है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि जिस अभ्यर्थी ने आवेदन किया है, परीक्षा भी उसी ने दी है और चयन के बाद नौकरी जॉइन करने वाला व्यक्ति भी वही है।
तीन स्तरों पर होगा डिजिटल वेरिफिकेशन
नई व्यवस्था के तहत पूरी भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की पहचान तीन प्रमुख चरणों में सत्यापित की जाएगी।
1. आवेदन के समय डिजिटल पहचान
ऑनलाइन आवेदन भरने के साथ ही अभ्यर्थी की डिजिटल पहचान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इससे भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत से ही उम्मीदवार की पहचान का रिकॉर्ड तैयार रहेगा और आगे के चरणों में उसका मिलान किया जा सकेगा।
2. परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक जांच
परीक्षा केंद्र में प्रवेश के समय केवल एडमिट कार्ड और फोटो पहचान पत्र की जांच तक प्रक्रिया सीमित नहीं रहेगी। अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसमें फिंगरप्रिंट स्कैनिंग के जरिए अंगूठे के निशान का मिलान किया जा सकता है। इसके साथ ही आईरिस स्कैन के माध्यम से आंखों की पहचान भी सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसी दूसरे व्यक्ति के अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी।
3. नौकरी जॉइन करते समय दोबारा पहचान का मिलान
परीक्षा में सफल होने के बाद भी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया समाप्त नहीं होगी। अंतिम चयन के बाद जब अभ्यर्थी नौकरी जॉइन करने पहुंचेगा, तब उसकी पहचान का दोबारा मिलान किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा देने वाला व्यक्ति और नियुक्ति के बाद जॉइन करने वाला व्यक्ति एक ही है।
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क्या आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा?
अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात यह है कि शुरुआती चरण में आधार प्रमाणीकरण को स्वैच्छिक और सहमति आधारित रखा गया है। यानी अभ्यर्थी की लिखित सहमति के बाद ही आधार आधारित प्रमाणीकरण का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस व्यवस्था के जरिए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ फर्जी अभ्यर्थियों और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। इससे मेहनत और योग्यता के आधार पर चयन पाने वाले उम्मीदवारों के हितों की भी बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।




