नई दिल्ली: अगर आप चिप्स, बिस्किट, नमकीन या सॉफ्ट ड्रिंक जैसे पैकेज्ड फूड का सेवन करते हैं और साथ ही अपनी सेहत को लेकर भी सतर्क रहते हैं, तो आने वाले समय में खरीदारी के दौरान इन उत्पादों की पहचान करना आसान हो सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) पैकेज्ड फूड की लेबलिंग व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के फ्रंट पैकेज पर लाल रंग का षट्कोणीय चेतावनी लेबल लगाने का प्रावधान किया जा सकता है, जिनमें तय सीमा से अधिक चीनी, संतृप्त वसा या नमक मौजूद हो। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही उत्पाद की पोषण संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है।
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कनाडा मॉडल से प्रेरित होगी व्यवस्था
FSSAI की प्रस्तावित व्यवस्था कनाडा समेत कुछ देशों में इस्तेमाल होने वाली फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबलिंग प्रणाली से प्रेरित बताई जा रही है। पैकेट के सामने लगाए जाने वाले लाल रंग के लेबल के जरिए उपभोक्ता को यह संकेत मिल सकेगा कि किसी उत्पाद में चीनी, नमक या संतृप्त वसा की मात्रा निर्धारित स्तर से अधिक है।
ऐसे में चिप्स, बिस्किट, नमकीन, एयरेटेड ड्रिंक और अन्य पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय ग्राहक पैकेट के सामने मौजूद चेतावनी को देखकर अधिक जानकारीपूर्ण निर्णय ले सकेंगे।
क्यों जरूरी मानी जा रही है नई व्यवस्था?
पैकेज्ड फूड में मौजूद ज्यादा चीनी, नमक और संतृप्त वसा के सेवन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं लगातार सामने आती रही हैं। प्रस्तावित लेबलिंग व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय ही उत्पाद की प्रमुख पोषण संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही उम्मीद है कि ऐसी चेतावनी से खाद्य कंपनियों को भी अपने उत्पादों में चीनी, नमक और संतृप्त वसा की मात्रा कम करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
खरीदारी के समय काम आएगा फ्रंट लेबल
अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो ग्राहकों को पैकेट के पीछे लिखी लंबी पोषण तालिका पढ़ने के बजाय फ्रंट पैकेज पर मौजूद चेतावनी से महत्वपूर्ण जानकारी जल्दी मिल सकेगी। इससे खासतौर पर अधिक चीनी, नमक या संतृप्त वसा वाले उत्पादों की पहचान आसान हो सकती है।




