नई दिल्ली: आमतौर पर अल्जाइमर को बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन एक नई रिसर्च ने इसके शुरुआती संकेतों को लेकर अहम जानकारी सामने रखी है। अध्ययन के मुताबिक, 65 साल से कम उम्र में होने वाला अल्जाइमर कई मामलों में अधिक उम्र में होने वाली बीमारी से अलग हो सकता है। कम उम्र के मरीजों में इसके लक्षण और इससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं भी अलग तरह की हो सकती हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि अल्जाइमर की पहचान होने से कई साल पहले ही शरीर में कुछ स्वास्थ्य संबंधी बदलाव दिखाई देने लग सकते हैं। ऐसे संकेतों को समझना जरूरी है, ताकि समय रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके।
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बीमारी की पहचान से 5 साल पहले दिख सकती हैं ये समस्याएं
रिसर्च के अनुसार, कम उम्र में अल्जाइमर से प्रभावित होने वाले लोगों में बीमारी का निदान होने से करीब पांच साल पहले ही कुछ स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं। इनमें डिप्रेशन, लगातार सिरदर्द, चक्कर आना और मिर्गी जैसी परेशानियां शामिल हैं।
इसके अलावा, मस्तिष्क में चोट, दिमाग की रक्तवाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां, थायरॉइड संबंधी समस्याएं और अत्यधिक शराब के सेवन से जुड़ी दिक्कतें भी इस आयु वर्ग के मरीजों में देखी गई हैं।
हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को अल्जाइमर ही है। ऐसी समस्याएं कई अन्य कारणों से भी हो सकती हैं। इसलिए सही जानकारी और जांच के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
6 से 10 साल पहले भी मिल सकते हैं संकेत
‘अल्जाइमर एंड डिमेंशिया: द जर्नल ऑफ द अल्जाइमर एसोसिएशन’ में प्रकाशित अध्ययन में यह भी बताया गया है कि कम उम्र में अल्जाइमर से प्रभावित होने वाले कुछ लोगों में बीमारी की पहचान से छह से दस साल पहले ही कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
इन संकेतों में कानों में लगातार घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देना और सुनने की क्षमता में कमी आना शामिल है। हालांकि, ये समस्याएं अपने आप में अल्जाइमर की पुष्टि नहीं करतीं। सुनने में परेशानी या कानों में लगातार आवाज आने के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
क्या दिल की बीमारियां हैं कम उम्र के अल्जाइमर की मुख्य वजह?
बढ़ती उम्र में होने वाले अल्जाइमर के जोखिम को समझने के लिए हाई ब्लड प्रेशर और खून में वसा की अधिक मात्रा जैसे हृदय संबंधी जोखिम कारकों पर भी ध्यान दिया जाता है। लेकिन अध्ययन में कम उम्र में होने वाले अल्जाइमर के मामले में तस्वीर कुछ अलग नजर आई।
शोधकर्ताओं के अनुसार, कम उम्र में अल्जाइमर से प्रभावित लोगों में हाई ब्लड प्रेशर और खून में वसा की अधिकता जैसे जोखिम कारक सामान्य लोगों की तुलना में अधिक आम नहीं पाए गए। इससे संकेत मिलता है कि कम उम्र में होने वाले अल्जाइमर के पीछे जोखिम कारकों का पैटर्न अधिक उम्र में शुरू होने वाली बीमारी से अलग हो सकता है।
किन बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
याददाश्त में लगातार गिरावट, रोजमर्रा के काम करने में परेशानी, परिचित जगहों पर रास्ता भूलना, बातचीत के दौरान सही शब्द याद न आना या सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
यह समझना जरूरी है कि सिरदर्द, चक्कर, डिप्रेशन, सुनने में कमी या कानों में घंटी बजने जैसी समस्याएं अकेले अल्जाइमर का प्रमाण नहीं हैं। लेकिन अगर याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में लगातार बदलाव हो रहे हैं, तो उन्हें उम्र का सामान्य असर मानकर टालना उचित नहीं है।
ध्यान दें: अल्जाइमर के शुरुआती संकेत हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। समय पर चिकित्सकीय जांच से लक्षणों के संभावित कारणों का पता लगाने और उचित देखभाल की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।




