बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) इन दिनों अचानक अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। खबरें हैं कि इस क्षेत्र से जहाज और प्लेन हटाए जा रहे हैं। इसके पीछे की वजह कोई सामान्य सुरक्षा drill नहीं बल्कि एक बड़ा जियो-पॉलिटिकल और मिलिट्री मूवमेंट है। माना जा रहा है कि 24-25 सितंबर को होने वाले घटनाक्रम ने चीन, पाकिस्तान और यूरोप तक की चिंता बढ़ा दी है।
बंगाल की खाड़ी क्यों है अहम?
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बंगाल की खाड़ी भारतीय महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) का सबसे रणनीतिक हिस्सा है।
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यह क्षेत्र भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड और श्रीलंका से जुड़ा हुआ है।
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यही से गुजरता है एशिया का सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्ग।
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ऊर्जा और तेल आपूर्ति के लिए भी यह रूट बेहद महत्वपूर्ण है।
जहाज और प्लेन क्यों हटाए जा रहे हैं?
सूत्रों के अनुसार—
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बड़ी सैन्य कवायद (Military Exercise) – भारत 24-25 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में मेगा नेवल एक्सरसाइज करने वाला है। इसमें इंडियन नेवी के साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्वाड देश शामिल होंगे।
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मिसाइल और ड्रोन टेस्टिंग – इस दौरान लंबी दूरी की मिसाइल और एडवांस्ड ड्रोन सिस्टम का परीक्षण हो सकता है।
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नो-फ्लाई ज़ोन और नो-सेल ज़ोन – सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र को अस्थायी तौर पर नो-फ्लाई और नो-सेल जोन घोषित किया गया है। इसलिए जहाज और हवाई जहाजों को हटाया जा रहा है।
चीन और पाकिस्तान क्यों हैं चिंतित?
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चीन – चीन की “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” (BRI) और उसके बंदरगाह प्रोजेक्ट्स (जैसे कि म्यांमार में क्याकप्यू पोर्ट) बंगाल की खाड़ी से जुड़े हैं। भारत की बढ़ती नेवल एक्टिविटी से चीन को डर है कि उसकी सप्लाई लाइन प्रभावित हो सकती है।
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पाकिस्तान – पाकिस्तान की नेवी इस क्षेत्र में कमजोर है, लेकिन चीन के साथ उसकी पार्टनरशिप के चलते उसे भारत की ताकतवर नौसेना से चिंता है।
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यूरोप – यूरोपीय देश भी इस क्षेत्र से भारी मात्रा में ट्रेड करते हैं। अगर यहां अस्थिरता होती है तो उनकी सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
ग्लोबल असर
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बंगाल की खाड़ी की स्थिति सीधे तौर पर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित करती है।
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यहां की मैरिटाइम सिक्योरिटी में जरा भी गड़बड़ी होने पर एशिया से लेकर यूरोप तक का व्यापार प्रभावित हो सकता है।
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यही कारण है कि 24-25 सितंबर की एक्सरसाइज से पहले जहाज और प्लेन हटाए जा रहे हैं ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो।
एक्सपर्ट्स की राय
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि—
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भारत इस एक्सरसाइज के जरिए अपने स्ट्रेटेजिक डॉमिनेंस का प्रदर्शन करेगा।
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क्वाड देशों की मौजूदगी यह मैसेज देती है कि चीन की बढ़ती गतिविधियों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
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पाकिस्तान और यूरोप की चिंता इस बात से है कि अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर उनके ट्रेड और सुरक्षा हितों पर भी पड़ेगा।
बंगाल की खाड़ी केवल एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि एशिया और यूरोप की अर्थव्यवस्था की धड़कन है। यही कारण है कि 24-25 सितंबर से पहले इसे खाली कराया जा रहा है। आने वाली मेगा मिलिट्री एक्सरसाइज न सिर्फ भारत की ताकत दिखाएगी बल्कि चीन और पाकिस्तान के लिए भी यह बड़ा संदेश होगी।
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