पैसे लेकर नौकरी दिलाने के लिए पूरा नेटवर्क खड़ा किया
ईडी का दावा है कि कुछ लोगों ने पैसे लेकर नौकरी दिलाने का पूरा नेटवर्क खड़ा किया था. इस नेटवर्क के जरिए योग्य उम्मीदवारों की जगह पैसे देने वाले लोगों को फायदा पहुंचाया गया. इस मामले में ED ने 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी PMLA के तहत जांच शुरू की. ED की जांच की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की उस FIR से हुई, जो कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद 2022 में ही दर्ज की गई थी. CBI और ED दोनों एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि भर्ती घोटाले से जुटाया गया पैसा कहां गया, किन लोगों तक पहुंचा और किस तरह इस पैसे को छिपाने या दूसरी जगह लगाने की कोशिश की गई. इस मामले में सबसे बड़ा नाम पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का सामने आया. ED ने उन्हें गिरफ्तार किया था. इसके अलावा उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी पर भी कार्रवाई की गई.
अर्पिता मुखर्जी के ठिकाने से मिली थी भारी नकदी
ED ने जब अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों पर छापेमारी की थी तो वहां से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी. एजेंसी के मुताबिक, करीब 49 करोड़ 80 लाख रुपये नकद और लगभग 5 करोड़ 8 लाख रुपये कीमत के सोने के गहने बरामद किए गए थे. इन बरामदगी के बाद जांच एजेंसी ने दावा किया था कि यह पैसा कथित तौर पर भर्ती घोटाले से जुड़े अवैध लेन-देन का हिस्सा हो सकता है. ED ने इस मामले में चंद्रनाथ सिन्हा को भी आरोपी बनाया है. एजेंसी ने मार्च 2024 में उनके ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था. इस दौरान ED को करीब 41 लाख रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे. जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि उनके नियंत्रण वाले बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा कराया गया था. ED के मुताबिक, चंद्रनाथ सिन्हा ने बीरभूम जिले के बोलपुर इलाके में अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर कई संपत्तियां खरीदी थीं. इन संपत्तियों को जांच एजेंसी ने अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है. ED ने इस मामले में अब तक कई चरणों में कार्रवाई की है. एजेंसी ने 19 सितंबर 2022 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी.
जब्ती की रकम करीब 154.91 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है
इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर ED ने कई सप्लीमेंट्री चार्जशीट अदालत में दाखिल कीं. 6 अगस्त 2025 को ED ने अपनी छठी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें चंद्रनाथ सिन्हा को आरोपी बनाया गया. ED के अनुसार, इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. एजेंसी ने करीब 98.65 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं. वहीं प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में कुल जब्ती और कुर्की की रकम करीब 154.91 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में अब तक 54 लोगों और संस्थाओं के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं. इनमें पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी, अर्पिता मुखर्जी और पूर्व विधायक मानिक भट्टाचार्य जैसे नाम शामिल हैं. ED का कहना है कि पश्चिम बंगाल में सिर्फ प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाला ही नहीं, बल्कि SSC सहायक शिक्षक भर्ती, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती मामलों में भी जांच चल रही है. इन सभी भर्ती घोटालों से जुड़े मामलों में ED ने अब तक करीब 486 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं.ED के कोलकाता कार्यालय के मुताबिक, भर्ती घोटालों से जुड़े अलग-अलग मामलों में अब तक कुल मिलाकर लगभग 641 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं. अब ED की पूछताछ में अभिषेक बनर्जी से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इस कथित भर्ती घोटाले में पैसों के लेन-देन और अन्य आरोपों से उनका कोई संबंध है या नहीं.




