CG Farmers News: छत्तीसगढ़ में किसानों की आमदनी बढ़ाने और धान की खेती पर निर्भरता कम करने के लिए राज्य सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत किसानों को धान के बजाय दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी व रागी जैसी मिलेट्स फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है।
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फसल विविधीकरण में तेजी लाने के निर्देश
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बुधवार को रायपुर संभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती को बाजार की मांग से जोड़ना जरूरी है। अधिकारियों को इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम करने और फसल विविधीकरण को प्राथमिकता देने को कहा गया।
हर जिले में विकसित होंगे 2 से 3 कृषि मॉडल
बैठक में प्रत्येक जिले में दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल विकसित करने पर जोर दिया गया। इन मॉडलों का चयन स्थानीय मिट्टी, जलवायु, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिनकी बाजार में मांग हो और जिनसे उनकी आमदनी बढ़ सके।
दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती पर जोर
प्रदेश में धान के अलावा दूसरी फसलों का रकबा बढ़ाने की योजना है। इसके तहत दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी व रागी जैसी मिलेट्स फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। निर्धारित फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, इस सहायता का लाभ लेने के लिए पात्रता, जरूरी शर्तों और आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगी।
उत्पादन से लेकर विपणन तक मिलेगी मदद
किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित सहायता देने के बजाय पूरी प्रक्रिया में सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत फसल चयन, उत्पादन और विपणन से जुड़े पहलुओं पर काम किया जाएगा, ताकि किसान बाजार की मांग के अनुरूप खेती कर सकें और उन्हें अपनी उपज बेचने में भी मदद मिल सके।
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15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी
समीक्षा बैठक में आगामी 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। कृषि विभाग, सहकारिता विभाग और मार्कफेड को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा गया, ताकि खरीदी के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।




