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CG News: पीड़िता के बयान विश्वसनीय नहीं, मेडिकल साक्ष्य भी समर्थन में नहीं, दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी को किया बरी

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CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 19 साल पुराने दुष्कर्म के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है. जस्टिस रजनी दुबे की एकलपीठ ने कहा कि पीड़िता का बयान विश्वसनीय नहीं है, और मेडिकल साक्ष्य भी अभियोजन के पक्ष में नहीं जाते.

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ये पूरा मामला बलरामपुर जिले का है. आरोपी ओंकार सिंह को वर्ष 2007 में विशेष सत्र न्यायालय (एससी-एसटी एक्ट) अंबिकापुर ने आईपीसी की धारा 376(1) के तहत दोषी ठहराते हुए 7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी. इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी.

क्या था पूरा मामला

26 फरवरी 2006 की शाम पीड़िता पानी भरने के बाद शौच के लिए गन्ने के खेत गई थी, जहां आरोपी ने जबरन उसके साथ दुष्कर्म किया. पीड़िता ने घर लौटकर सास को घटना बताई. पति के आने के बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई.

हाईकोर्ट ने आरोपी को किया बरी

हाईकोर्ट ने पाया कि, पीड़िता ने बयान में कहा कि उसने आरोपी को घटना से पहले कभी नहीं देखा, जबकि सास, पति और अन्य गवाहों ने स्वीकार किया कि आरोपी पड़ोसी था और उसका घर आना-जाना था. एफआईआर दर्ज कराने में तीन दिन की देरी हुई, जिसका संतोषजनक कारण नहीं बताया गया. मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर किसी भी तरह की बाहरी या आंतरिक चोट नहीं पाई गई. डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि हालिया यौन संबंध को लेकर कोई निश्चित राय नहीं दी जा सकती. सास ने यह भी स्वीकार किया कि उसी के कहने पर पीड़िता से रिपोर्ट दर्ज कराई गई. कोर्ट ने माना कि गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं और अभियोजन आरोप को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा.

कोर्ट का अहम अवलोकन

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि, केवल पीड़िता के बयान के आधार पर सजा तभी दी जा सकती है जब वह पूरी तरह विश्वसनीय और स्टर्लिंग क्वालिटी का हो. इस मामले में पीड़िता का बयान न तो सुसंगत था और न ही अन्य साक्ष्यों से पुष्ट रहा. हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

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