Census Duty: देश में आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन किया है। अब सरकारी शिक्षकों के अलावा निजी स्कूलों के शिक्षक, बैंक कर्मचारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) में काम करने वाले कर्मचारी और सरकारी विभागों के लिपिक व अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी जनगणना के काम में लगाए जा सकते हैं। इस संबंध में भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई है।
संशोधित प्रावधानों के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को भी जनगणना कार्य के लिए विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों की नियुक्ति करने की अनुमति दी गई है। इनमें नगर निगम, नगरपालिका, सहायता प्राप्त निजी संस्थानों, सोसायटी और ट्रस्ट के कर्मचारी भी शामिल हैं। इसके अलावा गेल और इंडियन ऑयल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तथा बैंकों के कर्मचारियों को भी जनगणना की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
जनगणना नियम 1990 में किया गया संशोधन
केंद्र सरकार ने जनगणना नियम, 1990 में बदलाव करते हुए कर्मचारियों की नियुक्ति का दायरा बढ़ाया है। इसके तहत राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी जनगणना कार्य में नियुक्त कर सकते हैं।
भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, जनगणना के लिए इन्यूमेरेटर यानी गणनाकर्मी और अन्य संबंधित जिम्मेदारियों के लिए शिक्षकों, लिपिकों और अधिकारियों की सेवाएं ली जा सकती हैं। इस बदलाव का उद्देश्य जनगणना के व्यापक कार्य को पूरा करने के लिए उपलब्ध मानव संसाधनों का इस्तेमाल करना है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका के बाद बदलाव
जनगणना नियमों में यह संशोधन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर एक याचिका के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस ने गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर तैनात करने के आदेश को चुनौती दी थी।
याचिका में दलील दी गई थी कि जनगणना अधिनियम, 1948 और संबंधित नियमों के तहत गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को गणनाकर्मी या पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने का स्पष्ट कानूनी अधिकार सरकार के पास नहीं है।
याचिकाकर्ता ने जनगणना अधिनियम की धारा 4ए का हवाला देते हुए कहा था कि इसमें स्थानीय निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं लेने का प्रावधान है, जबकि गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थान और उनके कर्मचारी इस श्रेणी में नहीं आते।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर को हरियाणा सरकार के उन दो सर्कुलर पर रोक लगाई थी, जिनके तहत जनगणना ड्यूटी के लिए चिह्नित शिक्षकों का विवरण मांगा गया था। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
दो चरणों में होगी जनगणना 2027
भारत की जनगणना 2027, आजादी के बाद देश की आठवीं जनगणना होगी। यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी।
- पहला चरण: मकानों और आवासीय सुविधाओं से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की जाएगी।
- दूसरा चरण: देश की आबादी की गणना की जाएगी और निर्धारित मानकों के अनुसार लोगों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी।
देश में जनगणना सामान्यतः हर 10 साल में कराई जाती है। वर्ष 2021 में होने वाली जनगणना को कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। अब जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच नियमों में किए गए इस संशोधन से गणना कार्य में लगाए जा सकने वाले कर्मचारियों का दायरा बढ़ गया है।




