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Tuesday, January 13, 2026

महादेव ऐप केस: ऑनलाइन सट्टा फिर मनी लॉन्ड्रिंग… सौरभ चंद्रकार और उसके साथियों के खिलाफ ED का बिग एक्शन, 91.82 करोड़ की संपत्ति कुर्क

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Mahadev App Case: ED (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा ऑनलाइन महादेव ऑनलाइन बुक केस में बड़ी कार्रवाई की है. ED रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एक अनंतिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी कर महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) और स्काईएक्सचेंज डॉट कॉम के ‘अवैध सट्टेबाजी संचालन’ के केस में लगभग 91.82 करोड़ रुपए की चल और अचल संपतियों को कुर्क किया है.

सौरभ चंद्राकर और साथियों के खिलाफ एक्शन

वर्तमान कार्रवाई में ED ने मेसर्स परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट एलएलसी और मेसर्स एक्जिम जनरल ट्रेडिंग- जीजेडसीओ के नाम पर जमा 74,28,87,483 रुपए की बैंक राशि कुर्क की है. ये संस्थाएं सौरभ चंद्रकार, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया से संबंधित हैं. इनका उपयोग उन्होंने अपराध की आय (पीओसी) को छिपाकर बेदाग निवेश के रूप में प्रदर्शित करने के लिए किया थ.

इसके अलावा, हरि शंकर तिबरेवाल (स्काईएक्सचेंज डॉट कॉम के मालिक) के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपए की संपत्ती जब्त की गई है. जब्त की गई संपत्तियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद उच्च मूल्य की रियल ईस्टेट संपतियां और नकदी परिसंपतियां शामिल हैं, जिनकी खरीदी नकद भुगतान (पीओसी) से किया जाना पाया गया.

ऑनलाइन सट्टा फिर मनी लॉन्ड्रिंग…

ईडी की जांच में पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक, स्काईएक्सचेंज डॉट कॉम आदि जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स से भारी मात्रा में व्यक्तिगत आय (पीओसी) उत्पन्न हुई, जिसकी मनी लॉन्ड्रिंग बेनामी बैंक खातों के एक जटिल जाल के माध्यम से की गई. यह भी पता चला है कि सौरभ चंद्रकार और अन्य लोगों ने महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता को मूर्ख बनाया और उनसे धोखाधड़ी की.

वेबसाइट में हेरफेर

महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन को कई अवैध स‌ट्टेबाजी वेबसाइटों या मोबाइल एप्लिकेशन (ऐप्स) हेतु ग्राहक प्राप्त करने और इन अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों के वित्तीय लेन-देन को संभालने में मदद करने के लिए बनाया गया था. हालांकि, इस प्रक्रिया में वेबसाइटों में इस तरह से हेरफेर किया गया कि अंततः सभी ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा. हजारों करोड़ रुपए की धनराशि एकत्र की गई और पूर्व-निर्धारित लाभ-साझाकरण शैली के आधार पर वितरित की गई. इसके अलावा फर्जी या चोरी किए गए केवाईसी का उपयोग करके बैंक खाते खोले गए और अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त धनराशि को छिपाया गया. इन सभी लेन-देन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें कर के दायरे में लाया गया.

जांच में यह भी पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफार्मों के माध्यम से उत्पन्न पीओसी को हवाला चैनलों, व्यापार आधारित मनी लॉन्ड्रिंग लेनदेन और क्रिप्टो संपत्तियों के उपयोग के माध्यम से भारत से बाहर स्थानांतरित किया गया और बाद में वापस भेजकर विदेशी एफपीआई के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया. ED द्वारा की गई जांच में एक जटिल ‘कैशबैक’ योजना का भी खुलासा हुआ, जिसमें उक्त एफपीआई संस्थाएं भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में भारी निवेश करती थीं और बदले में इन कंपनियों के प्रमोटरों को निवेश का 30% से 40% नकद वापस देना होता था. गगन गुप्ता को मेसर्स सालसार टेक्नो इंजीनियरिंग लिमिटेड और मेसर्स टाइगर लॉजिस्टिक्स लिमिटेड जैसी संस्थाओं से जुड़े ऐसे लेन-देन से कम से कम 98 करोड़ रुपए (प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट) के लाभार्थी के रूप में पहचाना गया है.

इस मामले में ED ने अब तक 175 से अधिक परिसरों पर तलाशी ली है. चल रही जांच के परिणामस्वरूप, लगभग 2,600 करोड़ रुपये की चल और अचल संपतियों को जब्त, फ्रीज या कुर्क किया गया है.

इसके अलावा ED ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और अब तक दायर पांच अभियोजन शिकायतों (पीसी) में 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है.

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