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Ratan Tata Passes Away: परोपकार की मिसाल थे पद्मविभूषण रतन टाटा, इन 4 कारणों से देश हमेशा उन्हें रखेगा याद

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 प्रतिष्ठित उद्योगपति और परोपकारी रतन टाटा का 86 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया। उन्होंने राष्ट्र सेवा के लिए जो कार्य किए उसे हमेशा देश याद रखेगा। स्वास्थ्य सेवा से लेकर छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान करने तक राष्ट्र सेवा के लिए हमेशा रतन टाटा आगे रहे। आइए पढ़ें कि रतन टाटा की लीडरशिप में टाटा ग्रुप ने कैसे मुश्किल परिस्थितियों में देश सेवा की।

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  1. देश में हर साल करीब 1200 करोड़ परमार्थ के लिए खर्च करता है टाटा ग्रुप।
  2. साल 2008 में टाटा मोटर्स की ओर से नैनो कॉर लॉन्च किया गया।

 दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के मानद प्रमुख रतन टाटा  नहीं रहे। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली। रतन टाटा ने न सिर्फ टाटा समूह को आसमान की बुलंदियों पर पहुंचाया बल्कि उन्होंने कई ऐसे ऐतिहासिक काम किए, जिसकी वजह से दुनिया उन्हें हमेशा याद रखेगी। देश के लिए उनका योगदान हमेशा एक नजीर रहेगा।

कोरोना महामारी के समय हमारा देश स्वास्थ्य संकटों से जूझ रहा था। उस समय टाटा समूह ने देश की मदद के लिए 1500 करोड़ रुपये का डोनेशन दिया। टाटा ट्रस्ट के प्रवक्ता देवाशीष राय का कहना है कि सामान्य हालात में ट्रस्ट हर साल करीब 1200 करोड़ परमार्थ के लिए खर्च करता है।

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