पश्चिमी देश रूस के उन्नत Su-35 और Su-57 लड़ाकू विमानों पर बड़ा दबाव बनाने की तैयारी में हैं। उनकी योजना रूस के सुखोई विमान प्रोग्राम की सप्लाई चेन और उत्पादन क्षमताओं को बाधित करने की है, ताकि उसकी सैन्य शक्ति को कमजोर किया जा सके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए प्रतिबंध उन तकनीकों और कलपुर्जों पर लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से Su-35 और Su-57 बनाए और मेंटेन किए जाते हैं। इससे रूस की मॉडर्न एयरफोर्स प्रोजेक्ट पर असर पड़ेगा और इन विमानों की तैनाती और उत्पादन में रुकावट आ सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम यूक्रेन युद्ध और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच लिया जा रहा है। पश्चिम द्वारा लिए गए इस रणनीतिक फैसले का मकसद सिर्फ रूस की वर्तमान लड़ाकू विमानों की क्षमता को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि लंबी अवधि में उसके सैन्य आधुनिकीकरण को धीमा करना भी है।
इसी बीच, यूरोपीय देशों द्वारा प्रस्तावित “स्काय शील्ड” (Sky Shield) नामक एयर सुरक्षा योजना भी चर्चा में है, जिसके तहत हल्के युद्धक विमानों को यूक्रेन के पश्चिमी हिस्सों में तैनात किया जा सकता है, हालांकि यह सीधी लड़ाई को बढ़ावा देने की बजाय एक तरफा सुरक्षा कवच बनाने की ओर एक कदम माना जा रहा है।








