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Desh - Videsh

SC बोला- क्या केजरीवाल जेल से साइन नहीं कर सकते:ऐसा कोई प्रतिबंध है; दोषी की याचिका- साइन न होने से सजा माफ नहीं हो रही

The Janta NewsBy The Janta NewsSeptember 7, 2024Updated:September 7, 2024No Comments6 Mins Read
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 सितंबर) को एक मामले में दोषी करार होने के बाद सजा काट रहे व्यक्ति की दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार उसकी सजा माफ करने में देरी लगा रही है।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच को दिल्ली सरकार ने कहा कि सीएम अरविंद केजरीवाल जेल में हैं। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी के चलते सजा माफ वाली फाइलों पर उनके साइन नहीं हो पा रहे हैं।

इस पर बेंच ने दिल्ली सरकार से पूछा कि क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जेल से अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के लिए कोई प्रतिबंध आदेश है? बेंच ने कहा हम इसकी जांच करना चाहते हैं क्योंकि इससे सैकड़ों मामले प्रभावित होंगे।

अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामल में ED ने 21 मार्च और भ्रष्टाचार के मामले में CBI ने ने 26 जून को गिरफ्तार किया था। 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत दी है, लेकिन भ्रष्टाचार मामले में वे जेल में हैं।

 बेंच ने पूछा- सीएम केजरीवाल सें जुड़े कोर्ट के पारित कई आदेशों के चलते बहुत सारी फाइलें होंगी। क्या मुख्यमंत्री को इन महत्वपूर्ण फाइलों पर साइन करने पर कोई प्रतिबंध है?

इस सवाल पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वे इस मुद्दे पर निर्देंश लेंगी। इसके बाद कोर्ट को बताएंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले के आदेश में दिल्ली सरकार को 2 महीने के अंदर दोषियों की सजा माफ करने के सवाल पर फैसला लेने का निर्देश दिया था। हालांकि, जुलाई में समय सीमा एक महीने के लिए बढ़ा दी गई थी।

लॉ एक्सपर्ट के मुताबिक, संविधान या कानून में जेल में बंद मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन जेल से सरकार चलाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

इसी साल 28 मार्च दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल को सीएम पद से हटाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया था।

हालांकि, कोर्ट का मानना था कि जेल से कैबिनेट फैसले, ऑफिशियल दस्तावेजों पर साइन, ट्रांसफर ऑडर्स पर साइन करना असंभव होगा, क्योंकि ये काम जेल में रहते हुए नहीं किए जा सकते हैं।

 दिल्ली शराब नीति केस में 5 सितंबर को अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने से पहले केजरीवाल और CBI का पक्ष सुना था।

अदालत में वकील ने कहा कि केजरीवाल को इसलिए गिरफ्तार किया गया, ताकि वे जेल से बाहर ना आ सकें जबकि जमानत नियम और जेल अपवाद है। मनीष सिसोदिया को जमानत देते वक्त कोर्ट ने यही कहा था।

CBI ने दलील दी कि केजरीवाल को जमानत के लिए पहले ट्रायल कोर्ट जाना चाहिए, सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आना चाहिए। अगर उन्हें जमानत मिली तो हाईकोर्ट को निराशा होगी।

1. यह अनोखा मामला है। के सख्त नियमों के बावजूद केजरीवाल को 2 बार जमानत दे दी गई।  केस में जमानत क्यों नहीं मिल सकती है।

2. CBI ने दलील दी है कि केजरीवाल सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के ही आदेश में कहा गया है कि यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि आरोपी खुद को दोषी बता दे।

3. अदालत को सिर्फ 3 सवालों पर ध्यान देना है। पहला- क्या केजरीवाल के भाग जाने का खतरा है? दूसरा- क्या वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं? तीसरा- क्या केजरीवाल गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं?

4. केजरीवाल एक संवैधानिक पद पर हैं, उनके भागने की कोई आशंका नहीं, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं हो सकती, क्योंकि लाखों दस्तावेज और 5 चार्जशीट मौजूद हैं। गवाहों को प्रभावित करने का खतरा भी नहीं है। बेल की 3 जरूरी शर्तें हमारे पक्ष में हैं।

5. मुझे लगता है कि इस मामले में CBI दलील नहीं दे रही है, कोई ऐसा आदमी बोल रहा है, जिसकी केस में दिलचस्पी है।

1. हमें जमानत पर आपत्ति है। यहां जमानत और गिरफ्तारी पर बहस को मिला दिया गया है। 2. मनीष सिसोदिया, के. कविता सभी पहले जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट गए थे। केजरीवाल सांप-सीढ़ी के खेल की तरह शॉर्टकट अपना रहे। 3. केजरीवाल को लगता है कि वे एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी व्यक्ति हैं, जिनके लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए। हमारा कहना है कि गिरफ्तारी पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहली अदालत नहीं होनी चाहिए। केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट जाना चाहिए। 4. ये गिरफ्तारी पर सवाल उठा रहे हैं, इन्हें कानून ध्यान से पढ़ना चाहिए। गिरफ्तारी जांच का ही एक हिस्सा है। अगर जांच करने की शक्ति है, तो गिरफ्तार करने की भी शक्ति है। 5. हमें स्पेशल कोर्ट से परमिशन मिली, वारंट जारी हुआ, इसके बाद हमने गिरफ्तारी की। जब प्रोसेस फॉलो करते हैं, तो मौलिक अधिकार लागू नहीं होते। 6. CBI ने केजरीवाल को कोई नोटिस नहीं भेजा, क्योंकि वे पहले से ही कस्टडी में थे।

7. अगर केजरीवाल को जमानत दी जाती है तो ये फैसला हाईकोर्ट को निराश करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस में अरविंद केजरीवाल को 12 जुलाई को जमानत दे दी थी। जमानत देते हुए जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा था कि केजरीवाल 90 दिन से जेल में हैं, इसलिए उन्हें रिहा किए जाने का निर्देश देते हैं। हम जानते हैं कि वह चुने हुए नेता हैं और ये उन्हें तय करना है कि वे मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं या नहीं।

जस्टिस खन्ना ने कहा था कि हम ये मामला बड़ी बेंच को ट्रांसफर कर रहे हैं। गिरफ्तारी की पॉलिसी क्या है, इसका आधार क्या है। इसके लिए हमने ऐसे 3 सवाल भी तैयार किए हैं। बड़ी बेंच अगर चाहे तो केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर बदलाव कर सकती है।

ने 9 जून को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सातवीं सप्लिमेंट्री चार्जशीट जमा की थी। 208 पेज की इस चार्जशीट में दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को केस का सरगना और साजिशकर्ता बताया गया। चार्जशीट में कहा गया कि स्कैम से मिला पैसा आम आदमी पार्टी पर खर्च हुआ है। यह भी दावा किया गया कि केजरीवाल ने शराब बेचने के कॉन्ट्रैक्ट के लिए साउथ ग्रुप के सदस्यों से 100 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 45 करोड़ रुपए गोवा चुनाव पर खर्च किए गए थे।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब नीति मामले से जुड़े CBI केस में CM अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 11 सितंबर तक बढ़ा दी है। कोर्ट ने CBI की सप्लिमेंट्री चार्जशीट पर भी संज्ञान लिया और केजरीवाल को समन जारी किया।

CBI ने अरविंद केजरीवाल, दुर्गेश पाठक, विनोद चौहान, आशीष माथुर, सरथ रेड्डी के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की थी। कोर्ट ने आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए 11 सितंबर तक का समय दिया है।

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