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चार्जशीट के मुताबिक, 25 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा पर बर्बर हमला किया गया था। उन्हें 51 बार चाकू से गोदा गया, जिसके बाद उनकी निर्मम हत्या कर दी गई। घटना के बाद उनका शव चांद बाग इलाके की नाली से बरामद हुआ था। जांच एजेंसियों ने ताहिर हुसैन और उनके साथियों पर इस साजिश का आरोप लगाया।
ताहिर हुसैन की ओर से दलील दी गई कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है और उनका सीधे तौर पर हत्या से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, अदालत ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और चार्जशीट व गवाहों के बयान में उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इसलिए जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया।
दिल्ली पुलिस की जांच के अनुसार, ताहिर हुसैन ने अपने घर से दंगाइयों को छत और आसपास के क्षेत्रों में पनाह दी थी। वहां से पत्थरबाजी, पेट्रोल बम और हथियारों का इस्तेमाल हुआ। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह पूर्व-नियोजित साजिश थी, जिसमें अंकित शर्मा की हत्या भी शामिल थी।
अंकित शर्मा हत्याकांड न सिर्फ दिल्ली दंगों का सबसे हाई-प्रोफाइल मामला माना जाता है, बल्कि इसने इंटेलिजेंस ब्यूरो के भीतर भी गहरी चोट पहुंचाई थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब केस की सुनवाई आगे बढ़ेगी और ताहिर हुसैन की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।



