भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य समारोह का शुभारंभ किया। यह आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है, बल्कि देशवासियों में एकता, स्वाभिमान और देशभक्ति की भावना को फिर से जगाने का प्रतीक भी है।
कार्यक्रम का आयोजन और विशेषताएँ:
कार्यक्रम का आयोजन इंडिया गेट परिसर में किया गया, जहाँ हजारों नागरिकों, छात्रों और कलाकारों ने एक साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ कई केंद्रीय मंत्री, सैन्य अधिकारी और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इस दौरान 150 विशेष कलाकारों ने राष्ट्रगीत पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जो भारत की विविधता और एकता को दर्शा रही थीं।
PM मोदी का संबोधन: अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा — “वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति है। यह वह स्वर है जिसने देश को आज़ादी के लिए एकजुट किया और आज भी हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।” उन्होंने आगे कहा कि आज का भारत आत्मनिर्भर भारत के मार्ग पर अग्रसर है और ‘वंदे मातरम्’ का हर शब्द इस आत्मविश्वास को मजबूत करता है।
वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व: वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी, और यह गीत 1905 के बंगाल विभाजन आंदोलन के दौरान भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया। यह गीत लाखों देशभक्तों के दिलों में जोश और बलिदान की भावना भरता था। 1950 में इसे भारत के राष्ट्रीय गीत (National Song) का दर्जा दिया गया।
देशभर में कार्यक्रम: ‘वंदे मातरम्@150’ के तहत बीजेपी ने घोषणा की है कि 7 नवंबर से पूरे देश में 150 स्थानों पर सामूहिक गायन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ, और अन्य राज्यों में वरिष्ठ नेता इस आयोजन का नेतृत्व करेंगे।








