नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि नया विकसित भारत रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 देशभर में एक जुलाई से लागू होगा। इसके साथ ही यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) की जगह ले लेगा। सरकार ने इसे ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टिकोण के अनुरूप आधुनिक ग्रामीण विकास की रूपरेखा बताया है।
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125 दिन होगी रोजगार गारंटी
सरकार के अनुसार इस कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वर्ष की जाएगी। हालांकि, विपक्षी दलों और श्रम अधिकार कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को समाप्त करने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह अधिकारों पर आधारित सामाजिक सुरक्षा योजना थी और नए अधिनियम में डिजिटल प्रक्रिया, चेहरे का सत्यापन और प्रशासनिक बदलाव श्रमिकों के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
नए कानून से क्या बदलेगा?
नए कानून के तहत ऐसे हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी। पहले यह सीमा 100 दिन की थी। केंद्र सरकार ने कहा कि यह योजना चार व्यापक कार्य श्रेणियों पर केंद्रित होगी, जिनमें जल संरक्षण परियोजनाएं; बुनियादी ग्रामीण ढांचा परियोजनाएं; आजीविका से संबंधित परियोजनाएं; और मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने की परियोजनाएं शामिल हैं।
मनरेगा के तहत कार्यों को व्यापक श्रेणियों में बांटा गया था, जैसे जल संरक्षण, सूखा-रोधी उपाय, सिंचाई, पारंपरिक जल निकायों का पुनर्निर्माण, भूमि विकास और बाढ़ नियंत्रण। इस कानून में ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ शामिल की गई है। इसके तहत ग्राम पंचायतें अपने इलाके के विकास के लिए एक संयुक्त योजना तैयार करेंगी, और इस योजना को ग्राम सभा की मंजूरी लेनी होगी।
सरकार के अनुसार, इस कानून के तहत सभी काम इन्हीं ग्राम विकास योजनाओं के आधार पर ही किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्य लोगों की जरूरतों के हिसाब से हों और हर क्षेत्र का संपूर्ण व संतुलित विकास किया जा सके।
नए कानून का कार्यान्वयन कैसे होगा?
केंद्र ने कहा है कि मनरेगा की जगह नए कानून का कार्यान्वयन ‘सुचारु और निर्बाध’ होगा। मनरेगा को औपचारिक रूप से एक जुलाई 2026 से समाप्त किया जाएगा, उसी तारीख को वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू होगा। मौजूदा मनरेगा कार्य जारी रहेंगे और उन्हें नए कानून के तहत उन्हें ढाला जाएगा। सरकार ने कहा है कि अधूरे सार्वजनिक कार्य और परियोजनाएं पूरी करने को प्राथमिकता दी जाएगी। जब तक नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी नहीं किए जाते तब तक उन श्रमिकों के लिए जॉब कार्ड अस्थायी रूप से मान्य रहेंगे, जिनकी ‘ई-केवाईसी’ पूरी हो चुकी है।
क्या चीजें नहीं बदलेंगी?
रोजगार की मांग करने के 15 दिन के अंदर रोजगार देना अनिवार्य रहेगा, ऐसा न करने पर श्रमिक राज्य सरकारों की ओर से दिए जाने वाले बेरोजगारी भत्ते के पात्र होंगे। मजदूरी का भुगतान बैंक या डाकघर खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जारी रहेगा और यह साप्ताहिक या ‘मस्टर रोल’ बंद होने के बाद 15 दिन के अंदर करना होगा। ‘मस्टर रोल’ एक आधिकारिक रजिस्टर या हाजिरी रिकॉर्ड होता है जिसमें किसी काम पर लगे मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जाती है। इस कानून में यह प्रावधान भी बनाए रखा गया है कि यदि मजदूरी का भुगतान देर से होता है, तो श्रमिकों को उसका मुआवजा (क्षतिपूर्ति) दिया जाएगा।
नए प्रशासनिक प्रावधान क्या हैं?
कार्यस्थलों पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए अब चेहरे की पहचान पर आधारित प्रणाली उपयोग की जाएगी। हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि जहां खराब इंटरनेट सुविधा, तकनीकी समस्या या अन्य वास्तविक कठिनाइयां होंगी, वहां छूट दी जाएगी। एक और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कृषि सीजन के चरम पर होने (जैसे बुवाई और कटाई के समय) के दौरान दूसरे काम करने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह अवधि राज्य सरकारें तय करेंगी, ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो।




