Navratri 2026: नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना और भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्रों का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में श्रद्धापूर्वक पूजा और मंत्र जाप करने से मन को शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद मिलती है। ऐसे में अगर आप भी नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करना चाहते हैं, तो इसका सही समय और इससे जुड़े नियम जानना जरूरी है। आइए जानते हैं कि सुबह और शाम किस समय मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है और किन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
मां दुर्गा के मंत्र जाप का सबसे शुभ समय क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त को पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए बेहद शुभ माना जाता है। सामान्यतः ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले शुरू होता है। इस दौरान वातावरण शांत रहता है, जिससे मन को एकाग्र करके आराधना करना आसान हो सकता है।
इसके अलावा, स्नान करने के बाद सूर्योदय से पहले भी मां दुर्गा के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। यदि किसी कारणवश सुबह जल्दी उठना संभव नहीं है, तो अपनी सुविधानुसार सुबह का कोई शांत समय निर्धारित करके नियमित रूप से मंत्र जाप कर सकते हैं। इसमें श्रद्धा, एकाग्रता और नियमितता को विशेष महत्व दिया जाता है।
शाम के समय कब करना चाहिए मंत्र जाप?
सुबह के अलावा शाम का समय भी पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए शुभ माना जाता है। कई भक्त सूर्यास्त के समय मां दुर्गा की आरती करते हैं और इसके बाद मंत्रों का जाप करते हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भक्त सूर्योदय के समय दुर्गा गायत्री मंत्र और सूर्यास्त के समय मां दुर्गा के अन्य मंत्रों का जाप कर सकते हैं। कुछ साधक मंत्रों की 108 आवृत्तियां पूरी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक आराधना करने से मन में सकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।
नवरात्रि में किन मंत्रों का करें जाप?
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की उपासना के लिए कई मंत्रों का जाप किया जाता है। इनमें देवी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने वाला मंत्र विशेष रूप से प्रचलित है।
1. मां दुर्गा का नवार्ण मंत्र
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’
इस मंत्र का जाप मां दुर्गा की आराधना के लिए किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार प्रतिदिन 108 बार इसका जाप कर सकते हैं।
2. दुर्गा गायत्री मंत्र
‘ॐ कात्यायन्यै विद्महे कन्याकुमारि धीमहि। तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥’
इस मंत्र का जाप देवी दुर्गा की उपासना के लिए किया जाता है। मंत्र का उच्चारण अपनी परंपरा के अनुसार सही विधि से करना चाहिए।
इसके अलावा, नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त प्रत्येक दिन संबंधित देवी स्वरूप के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।
मंत्र जाप करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
नवरात्रि में मंत्र जाप करते समय स्वच्छता और पूजा के प्रति श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। जाप से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा के लिए शांत स्थान चुनें। अपनी सुविधानुसार आसन पर बैठकर मां दुर्गा का ध्यान करें और एकाग्र मन से मंत्रों का जाप करें।
यदि आप माला से जाप कर रहे हैं, तो 108 मनकों वाली माला का उपयोग कर सकते हैं। मंत्रों का उच्चारण स्पष्ट रखें और जल्दबाजी से बचें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा और मंत्र जाप अपनी श्रद्धा, सामर्थ्य और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार करें।




