लखनऊ. कोलकाता घटना के बाद से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज सिंह ने गाइडलाइन जारी कर सभी अस्पतालों में समुचित सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही थी. जिसके बाद से ही स्वास्थ्य अमले से जुड़े लोग हर बिंदु पर जांच कर अस्पतालों, डॉक्टर्स के साथ मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कार्य करने में जुट गए है. इसी क्रम में मुख्य सचिव ने नया आदेश जारी किया है. जिसके अंतर्गत अब सरकारी अस्पतालों में रात में मरीजों की जांच या उनकी हालत को देखने के लिए जाने वाले डॉक्टरों की सुरक्षा में पुलिसकर्मी साथ रहेंगे. सभी अस्पतालों के ब्लॉक, होस्टल्स में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे, जबकि समय समय पर परिसर में उनको गस्त भी करने के निर्देश दिए गए है.बता दें कि अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगेंगे, जिससे हर समय निगरानी की जा सके. अस्पतालों में प्रवेश, निकास, वार्डो और उन तक जाने वाले रास्तों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं. साथ ही कंट्रोल रूम के ज़रिए इन कैमरों से अस्पताल की निगरानी करने के भी आदेश जारी किए गए हैं. मुख्य सचिव के निर्देश में स्पष्ट है कि अस्पताल अपने पास के निकटतम पुलिस स्टेशन से सम्पर्क में रहेंगे. साथ ही सुरक्षा के किसी भी मामले पर अतिरिक्त पुलिस बल मुहैया करवाने के लिए नजदीकी थाना प्रतिबद्ध होगा.अक्सर अस्पतालों में विवाद या फिर मारपीट की सूचनाएं सामने आती हैं, जिसको लेकर मुख्य सचिव ने हर अस्पताल में सुरक्षा समिति और हिंसा रोकथाम समिति बनाने के आदेश दिए हैं. जिससे किसी भी अप्रिय घटना होने से पहले ही रोक लगाई जा सके. इस समितियों में वरिष्ठ चिकित्सक और अस्पताल प्रशासन से जुड़े अधिकारी रहेंगे. इसके अलावा संविदा और आउट सोर्सिंग वाले कर्मचारी अब पुलिस सत्यापन के बाद ही अस्पतालों में अपनी जॉइनिंग दे पाएंगे. आदेश में स्पष्ट है कि अगर किसी भी प्रकार की चूक या हिंसा अस्पताल परिसर में होती है तो समिति द्वारा नज़दीकी पुलिस स्टेशन पर FIR करवाना ही होगा.
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