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Dussehra 2024: दशहरा की 400 साल पुरानी परंपरा पर रोक, नहीं चलेगी ‘बंदूक’

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देशभर में शनिवार को रावण दहन का आयोजन किया जाएगा. भारत की विविधता के कारण हर जगह की अपनी-अपनी परंपरा है. राजस्थान के झुंझुनू जिले के उदयपुरवाटी शहर में एक अनोखी परंपरा है जहां रावण और उसकी सेना के पुतलों पर बंदूकें चलाई जाती हैं. यह दादू पंथी समाज की 400 साल पुरानी परंपरा है, लेकिन इस बार रावण का पुतला तीर-कमान से जलाया जाएगा, क्योंकि पुलिस ने नए कानून के प्रावधानों के तहत अनुमति नहीं दी है.

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दादू पंथी पंच अखाड़ा मंत्री दयाराम स्वामी ने कहा कि परंपरा को कानून के मुताबिक बदलना हमारी मजबूरी है. इस बार रावण को मारने के लिए बंदूकों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. हम दशहरा उत्सव की रौनक कम नहीं होने देंगे, लेकिन कानून अपने हाथ में नहीं लेंगे. रावण के पास धनुष-बाण से मारने का एक वैकल्पिक तरीका होगा.

समिति के लोग और लाइसेंसी बंदूक धारक अपनी पिस्तौलें, बंदूकें आदि लेकर दशहरा मैदान पर पहुंचते हैं और रावण और उसके परिवार को गोलियों से भून देते हैं, लेकिन इस बार आग्नेयास्त्रों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होने के कारण यह संभव नहीं होगा.

पुलिस अधिकारी राजेश चौधरी ने बताया कि हाल ही में बनाए गए नए नियम के तहत उत्सव और त्योहारों के दौरान भी सार्वजनिक स्थानों पर फायरिंग नहीं की जा सकेगी. थाना प्रभारी ने कहा कि इस कानून के दायरे में लाइसेंस धारक भी आते हैं. इसलिए मंजूरी नहीं मिल सकेगी.

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