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Tuesday, February 3, 2026
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Rich on Paper: टेक सेक्टर इंजीनियरों की चमकदार सैलरी के पीछे छिपी कंगाली की सच्चाई

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Rich on Paper: टेक सेक्टर में काम करने वाले इंजीनियर भारत में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स माने जाते हैं। इनकी सालाना कमाई 20 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर इंजीनियर सिर्फ कागजों पर अमीर (Rich on Paper) हैं, असल जिंदगी में उनकी जेबें खाली रहती हैं।
Rich on Paper

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अच्छी सैलरी, लेकिन आर्थिक असुरक्षा

प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म टीम ब्लाइंड पर एक गुमनाम यूजर ने पोस्ट लिखते हुए अपनी परेशानी साझा की। उसने कहा:
“हम ग्लोबल टेक की रीढ़ हैं। लेकिन महीने के अंत में ज्यादातर इंजीनियरों की हालत ऐसी होती है कि उनके पास कुछ नहीं बचता। सैलरी तो बढ़ रही है, लेकिन मन की शांति और वित्तीय सुरक्षा गायब हो चुकी है।”

क्यों हैं इंजीनियर आर्थिक संकट में?

हालांकि बेंगलुरु जैसे शहरों में इंजीनियरों की सैलरी लाखों में है, लेकिन खर्चे भी उसी हिसाब से बढ़ जाते हैं।

  • ऊंचे हाउस रेंट: बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में किराए आसमान छू रहे हैं।
  • EMI का बोझ: कार, घर और गैजेट्स की ईएमआई जेब पर भारी पड़ती है।
  • फैमिली जिम्मेदारियां: परिवार, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं।
  • बचत कल्चर की कमी: ज्यादातर लोग सेविंग्स की बजाय लाइफस्टाइल और लग्जरी पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 1.5 लाख रुपये प्रति माह कमाने वाले इंजीनियर भी अक्सर महीने के अंत तक खाली हाथ रह जाते हैं।

नौकरी का डर और हेल्थ इमरजेंसी

टेक सेक्टर में जॉब सिक्योरिटी बड़ी चिंता बन चुकी है। छंटनी की खबरें आए दिन सुनने को मिलती हैं। वहीं अचानक आई बीमारियां या मेडिकल इमरजेंसी इंजीनियरों की फाइनेंशियल स्थिति को और खराब कर देती हैं।

ज्यादातर इंजीनियर ईपीएफ, एनपीएस या कंपनी द्वारा दी गई सुविधाओं पर ही निर्भर रहते हैं। बहुत कम लोग अपनी संपत्ति या इन्वेस्टमेंट को प्रोफेशनल तरीके से मैनेज करते हैं।

कंपनियों की पहल, लेकिन काफी नहीं

कुछ बड़ी कंपनियां जैसे Deloitte, Dell India और P&G अपने कर्मचारियों के लिए फाइनेंशियल वेलनेस प्रोग्राम चला रही हैं।

  • इनमें फाइनेंशियल काउंसलिंग, इन्वेस्टमेंट गाइडेंस और प्लानिंग टूल्स दिए जाते हैं।
  • लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यह कदम काफी नहीं हैं।

एक पोस्ट में कहा गया:
“कंपनियां हाइक, बोनस और वेलनेस टॉक्स तो देती हैं, लेकिन कितनी कंपनियां हमें सुरक्षित भविष्य की योजना बनाने के टूल्स देती हैं?”

Rich on Paper की असली सच्चाई

  • दिखावे की लाइफस्टाइल और बढ़ते खर्चे इंजीनियरों को कर्ज में धकेल रहे हैं।
  • टेक प्रोफेशनल्स की उच्च आय होने के बावजूद उनकी बचत बेहद कम है।
  • आर्थिक असुरक्षा और नौकरी खोने का डर इन्हें लगातार परेशान कर रहा है।

टेक इंजीनियर भले ही सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स हों, लेकिन हकीकत यह है कि उनमें से कई सिर्फ “Rich on Paper” हैं। असल जिंदगी में वे कर्ज, ईएमआई और बढ़ते खर्चों की वजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि केवल उच्च आय पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही फाइनेंशियल प्लानिंग और सेविंग हैबिट्स ही असली अमीरी की कुंजी है।

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