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Saturday, November 29, 2025

Navratri 2025: महत्व, पूजा विधि, नौ देवियां और परंपराएं

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भारत में त्योहारों का कैलेंडर आस्था और उल्लास से भरा होता है, लेकिन Navratri  का स्थान सबसे खास है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं, कलश स्थापना करते हैं और मां अम्बे से सुख-समृद्धि, शक्ति और शांति की कामना करते हैं। नवरात्रि केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रंगों से भी जुड़ा हुआ पर्व है। गुजरात में गरबा-डांडिया की धूम होती है, बंगाल में दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है, जबकि उत्तर भारत में रामलीला और दशहरा का पर्व इसे और विशेष बना देता है। इसीलिए नवरात्रि को भक्ति, शक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम कहा जाता है।|

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Navratri का धार्मिक महत्व

Navratri शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध कर धर्म की रक्षा की थी। इसीलिए नवरात्रि अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक मानी जाती है।

  • यह पर्व आत्मशक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

  • उपवास और व्रत से शरीर व मन की शुद्धि होती है।

  • मां दुर्गा की कृपा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

नवरात्रि पूजा विधि

1. कलश स्थापना (घटस्थापना)

  • शुभ मुहूर्त में मिट्टी के पात्र में जौ बोएं।

  • जल भरा कलश उस पर स्थापित करें और उस पर नारियल, आम के पत्ते और स्वस्तिक का चिन्ह लगाएं।

  • कलश पर लाल वस्त्र बांधें और देवी की प्रतिमा के सामने रखें।

2. मां दुर्गा की आराधना

  • प्रतिदिन माता के अलग-अलग स्वरूप की पूजा करें।

  • मंत्रोच्चार, दुर्गा सप्तशती पाठ और आरती का आयोजन करें।

  • धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें।

3. व्रत और उपवास नियम

  • नवरात्रि में फलाहार और सात्विक भोजन किया जाता है।

  • लहसुन, प्याज और मांसाहार का त्याग करना चाहिए।

  • एक समय भोजन या केवल फलाहार का नियम अपनाया जाता है।

4. कन्या पूजन

  • अष्टमी और नवमी के दिन छोटी कन्याओं को भोजन कराकर उनकी पूजा की जाती है।

  • उन्हें उपहार और दक्षिणा दी जाती है।

नौ देवियों के स्वरूप और उनका महत्व

  1. शैलपुत्री – पर्वतराज हिमालय की पुत्री, शक्ति और स्थिरता की प्रतीक।

  2. ब्रह्मचारिणी – तप, संयम और ज्ञान का प्रतीक रूप।

  3. चंद्रघंटा – शौर्य, साहस और निर्भयता प्रदान करने वाली।

  4. कुष्मांडा – सृष्टि की उत्पत्ति करने वाली शक्ति।

  5. स्कंदमाता – ज्ञान और मोक्ष की दात्री।

  6. कात्यायनी – शत्रुनाश और विजय की देवी।

  7. कालरात्रि – भय और नकारात्मकता का नाश करने वाली।

  8. महागौरी – शांति, पवित्रता और सौंदर्य की प्रतीक।

  9. सिद्धिदात्री – सभी प्रकार की सिद्धियां और आशीर्वाद देने वाली।

नवरात्रि और सांस्कृतिक परंपराएं

गरबा और डांडिया (गुजरात व महाराष्ट्र)

नवरात्रि के दौरान गुजरात और महाराष्ट्र में रातभर गरबा और डांडिया खेला जाता है। लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनकर नृत्य करते हैं और मां अम्बे की आराधना करते हैं।

दुर्गा पूजा (पश्चिम बंगाल और असम)

पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में दुर्गा पूजा पंडालों का भव्य आयोजन होता है। यहां विशाल प्रतिमाएं स्थापित कर कई दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

रामलीला और दशहरा (उत्तर भारत)

उत्तर भारत में नवरात्रि के दौरान रामलीला का मंचन होता है और दशहरे पर रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।

नवरात्रि में करने योग्य उपाय

  • रोज मां दुर्गा को लाल पुष्प अर्पित करें।

  • दुर्गा सप्तशती या देवी कवच का पाठ करें।

  • नवरात्रि में लाल, पीले या गुलाबी वस्त्र पहनना शुभ होता है।

  • जरूरतमंदों को भोजन और दान दें।

  • कन्याओं और ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

नवरात्रि 2025 के फायदे

  • जीवन में आत्मबल और सकारात्मकता आती है।

  • घर-परिवार में शांति और समृद्धि बनी रहती है।

  • व्यापार और करियर में सफलता के अवसर बढ़ते हैं।

  • रोग और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

FAQs

Q1. नवरात्रि में उपवास का क्या महत्व है?
नवरात्रि में उपवास करने से शरीर शुद्ध होता है, मन में एकाग्रता आती है और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।

Q2. नवरात्रि में प्याज-लहसुन क्यों नहीं खाते?
प्याज और लहसुन तामसिक भोजन माने जाते हैं, जो साधना और भक्ति में बाधा डालते हैं।

Q3. क्या नवरात्रि में मांसाहार खाना उचित है?
नवरात्रि के दौरान मांसाहार वर्जित है। सात्विक भोजन करने से पूजा का पूर्ण फल मिलता है।

Q4. नवरात्रि में कौन से रंग पहनना शुभ होता है?
नवरात्रि में लाल, पीला, गुलाबी और नारंगी जैसे शुभ रंगों के वस्त्र पहनना मंगलकारी माना जाता है।

निष्कर्ष

नवरात्रि 2025 भक्ति, शक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन की हर कठिनाई का सामना साहस और विश्वास से किया जा सकता है। नौ दिनों की साधना और पूजा से व्यक्ति को न सिर्फ आध्यात्मिक शक्ति मिलती है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी मिलता है।

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