उत्तर प्रदेश में आज से “गंगा उत्सव 2025” की शुरुआत हो गई है। यह कार्यक्रम राज्य के सभी 75 जिलों में एक साथ आयोजित किया जा रहा है, जिसमें गंगा नदी की स्वच्छता, संरक्षण और संस्कृति पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उत्सव को ‘जनभागीदारी का पर्व’ बताया और कहा कि गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। उन्होंने जनता से अपील की कि “गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।”
“गंगा उत्सव 2025” का उद्देश्य
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी को प्रदूषण-मुक्त और स्वच्छ बनाना है।
इसके अंतर्गत:
- नदी किनारों की सफाई अभियान
- जनजागरूकता रैली
- स्कूलों और कॉलेजों में चित्रकला प्रतियोगिता
- गंगा आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों का मकसद है कि लोग गंगा से भावनात्मक रूप से जुड़ें और स्वच्छता को अपनी आदत बनाएं।
गंगा की सांस्कृतिक पहचान पर जोर
“गंगा उत्सव 2025” केवल सफाई का अभियान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का उत्सव भी है। विभिन्न जिलों में गंगा तटों पर लोक नृत्य, भजन संध्या और योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर जैसे शहरों में गंगा आरती देखने हजारों श्रद्धालु पहुंचे। योगी सरकार का कहना है कि यह पहल गंगा के प्रति लोगों की आस्था को पुनर्जीवित करेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।
नमामी गंगे योजना से जुड़ी पहल
यह उत्सव केंद्र सरकार की “नमामी गंगे मिशन” का हिस्सा है। इस मिशन के तहत गंगा नदी में गिरने वाले नालों को बंद किया जा रहा है और नदी किनारे के गांवों में सॉलिड-वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक गंगा को पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त किया जा सके।
जनता की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएँ और स्थानीय लोग शामिल हुए। कई जिलों में महिलाएँ “गंगा स्वच्छता शपथ” लेकर अभियान में जुड़ीं।सरकारी विभागों के साथ-साथ आम जनता का यह सहयोग इस उत्सव को एक जन आंदोलन बना रहा है।








