भारत का व्यापार घाटा फरवरी में घटकर 27.1 अरब डॉलर पर आ गया है, जो पिछले महीनों की तुलना में कुछ राहत भरी खबर मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार निर्यात में सुधार और आयात में हल्की कमी के कारण व्यापार घाटे में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के चलते आने वाले महीनों में स्थिति फिर चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर Iran से जुड़े संकट और वैश्विक व्यापार में टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता का असर भारत के आयात-निर्यात पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी व्यापार संतुलन को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक माना जा रहा है।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक प्रतिबंध बढ़ते हैं तो भारत के लिए व्यापार संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में निर्यात बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और नए बाजारों की तलाश जैसे कदम अहम साबित हो सकते हैं।







