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Monday, February 16, 2026
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अदाणी पोर्ट्स करेगी 13,000 करोड़ का निवेश, कारोबार विस्तार के लिए इन क्षेत्रों पर रहेगा खास फोकस

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अदाणी पोर्ट्स 13,000 करोड़ रुपये के निवेश से विड़िण्गम पोर्ट को बनाएगी ट्रांजिट हब, समुद्री और लॉजिस्टिक्स कारोबार के विस्तार पर जोर

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अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक ज़ोन (APSEZ) के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने हाल ही में घोषणा की कि कंपनी अपने तीन प्रमुख क्षेत्रों—समुद्री, लॉजिस्टिक्स और कृषि-लॉजिस्टिक्स—में कारोबार विस्तार पर ध्यान दे रही है। भारत की सबसे बड़ी निजी पोर्ट ऑपरेटर APSEZ, विड़िण्गम इंटरनेशनल पोर्ट के दूसरे चरण के तहत 13,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस निवेश से पोर्ट की मौजूदा 12 लाख TEU की माल ढुलाई क्षमता 2028 तक बढ़कर करीब 50 लाख TEU हो जाएगी। इस पोर्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 मई को किया था और इसका निर्माण 8,867 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ है।

करण अदाणी ने बताया कि कंपनी न सिर्फ भारत के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी समुद्री कारोबार के विस्तार की योजना बना रही है। लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में APSEZ मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क बनाने पर काम कर रही है, ताकि माल की मात्रा और संचालन क्षमता दोनों बढ़ाई जा सकें।

कृषि लॉजिस्टिक्स में भी विस्तार की योजना
कृषि-लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में करण अदाणी ने कहा कि भारत में अनाज का भंडारण आज भी काफी असंगठित है, इसलिए कंपनी साइलो निर्माण और आधुनिक भंडारण व्यवस्था पर निवेश करने जा रही है।

विड़िण्गम पोर्ट की खासियत
विड़िण्गम इंटरनेशनल पोर्ट भारत का पहला ऐसा पोर्ट है जो 100% ट्रांजिट कार्गो पर केंद्रित होगा, यानी यहां आने-जाने वाला माल पूरी तरह से पारगमन के लिए होगा। अदाणी ने बताया कि भारत का अधिकांश पारगमन माल अभी सिंगापुर, कोलंबो और अन्य विदेशी पोर्ट्स के जरिए ट्रांसफर होता है। इस कारण भारतीय पोर्ट्स को हर साल लगभग 20–22 करोड़ डॉलर का राजस्व नुकसान होता है। विड़िण्गम पोर्ट इस ट्रैफिक को भारत में लाने का प्रयास करेगा।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा की तैयारी
करण अदाणी ने कहा कि विड़िण्गम पोर्ट को अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स जैसे कोलंबो और सिंगापुर से प्रतिस्पर्धा करनी होगी—सिर्फ शुल्क में ही नहीं, बल्कि संचालन दक्षता, उत्पादकता और सेवाओं के सभी पहलुओं में। उन्होंने यह भी बताया कि APSEZ दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका में अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण की संभावनाओं को भी तलाश रहा है।

क्या आप विड़िण्गम पोर्ट के ट्रांजिट हब बनने को भारत की लॉजिस्टिक शक्ति में बड़ा बदलाव मानते हैं?

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