बिहार की राजनीति में चल रही सीट शेयरिंग की चर्चाओं पर आखिरकार विराम लग गया है। एनडीए (NDA) गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर सहमति बन चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच हुई अहम बैठक में सबकुछ “ऑल इज वेल” नज़र आया। इस मीटिंग के बाद यह साफ हो गया कि बिहार में भाजपा और जेडीयू (JDU) मिलकर लोकसभा चुनाव की तैयारी मजबूती से करेंगे।
बैठक में बनी सहमति
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई मुलाकात में दोनों नेताओं ने सीटों के बंटवारे को लेकर आखिरी मुहर लगा दी। चर्चा लंबी चली लेकिन अंत में सभी मुद्दों पर सहमति बन गई।
- भाजपा और जेडीयू ने मिलकर फॉर्मूला तय कर लिया है।
- दोनों दल चुनावी तालमेल और रणनीति को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिखे।
- मीटिंग से बाहर निकलने के बाद दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज से साफ था कि अंदर कोई मतभेद नहीं हुआ।
क्या है नया फॉर्मूला?
हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन संकेत हैं कि—
- भाजपा सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
- जेडीयू को भी सम्मानजनक हिस्सेदारी दी जाएगी।
- छोटे सहयोगी दलों (जैसे हम, एलजेपी) के लिए भी कुछ सीटें छोड़ी जाएंगी।
इस फॉर्मूले को लेकर नीतीश कुमार पूरी तरह संतुष्ट दिखे। वहीं, भाजपा भी मानती है कि बिहार में नीतीश कुमार का समर्थन चुनाव जीतने के लिए बेहद जरूरी है।
अमित शाह-नीतीश कुमार का संदेश
बैठक के बाद सामने आए संदेश ने अटकलों को खत्म कर दिया।
- अमित शाह ने कहा कि बिहार में NDA एकजुट है और मजबूती से चुनाव मैदान में उतरेगा।
- नीतीश कुमार ने भी दोहराया कि “गठबंधन में सबकुछ ठीक है, हम मिलकर चुनाव जीतेंगे।”
क्यों थी सीट शेयरिंग अहम?
बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। 2019 चुनाव में भाजपा-जेडीयू गठबंधन ने मिलकर शानदार प्रदर्शन किया था। लेकिन इस बार विपक्षी महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां) पूरे दमखम से चुनावी मैदान में है। यही वजह थी कि सीटों का बंटवारा विवाद का कारण बन सकता था। लेकिन अब NDA ने समय रहते यह मुद्दा सुलझा लिया है।
सियासी असर
- सीट शेयरिंग पर सहमति से NDA कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ा है।
- महागठबंधन के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि विपक्ष को उम्मीद थी कि NDA अंदरूनी खींचतान में फंस जाएगा।
- अब भाजपा और जेडीयू दोनों मिलकर संयुक्त रैलियों और चुनावी प्रचार की तैयारी करेंगे।
निष्कर्ष
बिहार NDA की राजनीति में सीट शेयरिंग को लेकर उठ रहे सवाल अब खत्म हो गए हैं। नीतीश कुमार और अमित शाह की मुलाकात ने साफ कर दिया कि NDA पहले से ज्यादा मजबूत होकर लोकसभा चुनाव में उतरेगा।
इस मुलाकात के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहार की सियासत में अभी के लिए “सबकुछ ऑल इज वेल” है।








