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Tuesday, February 3, 2026
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FSSAI की सख्त जांच: भारत में बिकने वाले अंडों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, देशभर से सैंपल की जा रही है जांच

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सर्दियां आते ही अंडा खाने वालों की लिस्ट काफी बढ़ जाती है। भारत में प्रोटीन के नेचुरल सोर्स के रूप में अंडे का इस्तेमाल काफी ज्यादा किया जाता है। लेकिन पिछले दिनों अंडा बेचने वाली एक बड़ी कंपनी के अंडों में मिलावट और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे। जिसके बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सोमवार को देश भर में ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड दोनों तरह के अंडों के नमूने इकट्ठा करने को कहा है। एफएसएसआई अंडे में नाइट्रोफ्यूरान की जांच के लिए अंडों को टेस्टिंग लैब्स में भेजने का निर्देश दिया गया है।

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देशभर में बिकने वाले अंडों की होगी जांच

Fssai ने सभी राज्यों के अधिकारियों को यह नोटिफिकेशन दिया है कि बाजार में बिकने वाले ब्रांडेड और उन ब्रांडेड अंडों की जांच की जाए उनके सैंपल लेकर लैब में जांच की जाए। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मुर्गी पालन में अवैध रूप से ऐसी दवाओं का उपयोग किए जाने पर इनके अवशेष अंडों में प्रवेश कर सकते हैं। जिसे लेकर अब देशभर में बिकने वाले अंडों के सैंपल लिए जा रहे हैं। क्योंकि अंडों में जिस नाइट्रोफ्यूरान केमिकल के पाए जाने की बात सामने आ रही है वो एक बेहद जहरीला केमिकल है जो कि भारत समेत विदेशों में बैन है। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

नाइट्रोफ्यूरान वाले अंडे खाने से हो सकता है कैंसर

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि पोल्ट्री में एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग एक बड़ा मुद्दा है जो इंसानों में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा पैदा करता है। नाइट्रोफ्यूरान विश्व स्तर पर प्रतिबंधित हैं क्योंकि इनके अवशेष पकाने के बाद भी अंडों में बने रह सकते हैं। जानवरों पर किए गए अध्ययनों में दूषित अंडों के लंबे समय तक सेवन को आनुवंशिक क्षति और कैंसर के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है, साथ ही इससे किडनी और लिवर को भी नुकसान हो सकता है। इस केमिकल का अंडों में पाए जाने का एक कारण मुर्गी पालन में इस्तेमाल होने वाला गंदा खाना और मुर्गियों को गंदे तरीके से रखना भी हो सकता है।

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