बाजार में बिकने वाले ऐसे उत्पादों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कदम उठाया है, जो देखने और इस्तेमाल में पनीर जैसे होते हैं, लेकिन उन्हें बनाने में दूध का इस्तेमाल नहीं किया जाता। FSSAI ने इसके लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें गैर-दूध सामग्री से बने उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, जो उत्पाद दूध के बजाय स्टार्च, वनस्पति तेल या अन्य गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किए जाते हैं, उन्हें अब ‘पनीर’ के नाम से बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे उत्पादों को उनकी वास्तविक प्रकृति और पहचान के अनुरूप अलग नाम से बेचना होगा।
‘पनीर’ नाम से उपभोक्ताओं को गुमराह करने पर रोक
FSSAI का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। कई उत्पाद दिखने और उपयोग में पनीर जैसे होते हैं, लेकिन उनमें दूध या डेयरी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाता। ऐसे उत्पादों को ‘पनीर’ नाम से बेचने से उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
‘Analogue in Dairy Context’ उत्पादों पर भी लागू होगा प्रस्ताव
ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार, ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी में पहले से लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन वाले उत्पाद भी अपने नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इन उत्पादों को पनीर से अलग पहचान के साथ बाजार में पेश करना होगा।
60 दिनों में मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
FSSAI ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर आम लोगों, कारोबारियों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके लिए 60 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। सुझाव और आपत्तियां FSSAI के CEO को या regulation@fssai.gov.in पर भेजी जा सकती हैं।
FSSAI की यह पहल ऐसे उत्पादों की लेबलिंग और मार्केटिंग को स्पष्ट करने की दिशा में है, ताकि उपभोक्ताओं को यह आसानी से पता चल सके कि वे जिस उत्पाद को खरीद रहे हैं, वह वास्तविक डेयरी पनीर है या गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किया गया विकल्प।




