Navratri Vrat Tips: शारदीय नवरात्र के दौरान भक्त मां दुर्गा की आराधना के साथ उपवास भी रखते हैं। व्रत के दौरान नियमित भोजन की जगह फलाहार और सात्विक आहार लिया जाता है। हालांकि, खानपान में लापरवाही, लंबे समय तक भूखे रहना और जरूरत से ज्यादा तली-भुनी चीजें खाना सेहत पर भारी पड़ सकता है। इससे कमजोरी, डिहाइड्रेशन और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर आप भी नवरात्र में व्रत रख रहे हैं, तो पूजा-पाठ के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। सही खानपान और पर्याप्त आराम से व्रत के दौरान होने वाली परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है।
1. पानी पीने में न करें लापरवाही
व्रत के दौरान कई लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते, जिससे शरीर में पानी की कमी, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। अपनी जरूरत के अनुसार नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ भी ले सकते हैं। यदि आपको किसी बीमारी के कारण पानी सीमित मात्रा में पीने की सलाह दी गई है, तो उसी का पालन करें।
2. डाइट में शामिल करें एनर्जी देने वाले फल
उपवास के दौरान खानपान सीमित होने से कुछ लोगों को कमजोरी महसूस हो सकती है। इससे बचने के लिए केला, सेब, पपीता और दूसरे मौसमी फलों को आहार में शामिल करें। इसके अलावा बादाम, अखरोट और मखाने भी खा सकते हैं। ये खाद्य पदार्थ शरीर को ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करते हैं।
3. फलाहार के नाम पर ज्यादा तला-भुना न खाएं
व्रत में कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूरियां, पकौड़े और चिप्स खाना आम है। लेकिन ज्यादा तला-भुना और तेल-मसाले वाला भोजन खाने से पेट भारी होने, गैस और एसिडिटी की परेशानी बढ़ सकती है।
इसलिए फलाहार में उबले आलू, कम तेल में तैयार व्यंजन, सिंघाड़े के आटे की रोटी और ताजे फल जैसे विकल्प चुनें। भोजन की मात्रा भी संतुलित रखें, ताकि पेट पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
4. सेंधा नमक का इस्तेमाल भी सीमित रखें
नवरात्र के व्रत में सामान्य नमक की जगह अक्सर सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसे अधिक मात्रा में खाना सुरक्षित है। सेंधा नमक में भी सोडियम होता है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें। खासकर हाई ब्लड प्रेशर या किडनी संबंधी परेशानी वाले लोग नमक को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें।
5. खाली पेट बार-बार चाय-कॉफी पीने से बचें
कुछ लोग व्रत के दौरान थकान दूर करने के लिए बार-बार चाय या कॉफी पीते हैं। अधिक कैफीन लेने से कुछ लोगों को पेट में जलन, बेचैनी या नींद से जुड़ी परेशानी हो सकती है। खाली पेट चाय-कॉफी पीने से एसिडिटी भी बढ़ सकती है।
ऐसे में चाय-कॉफी की मात्रा सीमित रखें और पर्याप्त पानी पिएं। जरूरत के अनुसार नारियल पानी, छाछ या अन्य उपयुक्त पेय पदार्थों को भी अपने फलाहार में शामिल कर सकते हैं।
6. पर्याप्त आराम और नींद लें
व्रत के दौरान खानपान में बदलाव के कारण शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त आराम करना जरूरी है। रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें और कमजोरी महसूस होने पर भारी व्यायाम या अधिक शारीरिक मेहनत से बचें।
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अगर व्रत के दौरान चक्कर आने, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें। डायबिटीज या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को उपवास रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
ध्यान रखें: नवरात्र का व्रत रखते समय भूखे रहने या खानपान में जरूरत से ज्यादा पाबंदी लगाने के बजाय संतुलित फलाहार, पर्याप्त तरल पदार्थ और आराम को प्राथमिकता दें। इससे धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत का भी बेहतर ध्यान रखा जा सकता है।




