बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता संजय मिश्रा ने आज के फिल्म उद्योग पर अपनी बेबाक राय व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी सिनेमा में बड़ी और भव्य फिल्मों की कोई कमी नहीं है, लेकिन अब समय आ गया है कि मानवीय पहलुओं और भावनाओं से जुड़ी कहानियों पर अधिक काम किया जाए। उनकी मान्यता है कि दर्शक केवल विजुअल ग्रैंडर नहीं, बल्कि दिल को छू लेने वाली कहानियां भी चाहते हैं।
संजय मिश्रा ने कहा,
“हमने कई बड़ी फिल्में बना लीं, लेकिन अब जरूरत उन कहानियों की है जो इंसान के भीतर की भावनाओं, संघर्षों और रिश्तों को खूबसूरती से दिखा सकें। दर्शक खुद को स्क्रीन पर देखना पसंद करते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के आने के बाद दर्शकों की पसंद बदल गई है। अब लोग यथार्थ से जुड़ी स्क्रिप्ट, मजबूत पात्रों और सादगीपूर्ण लेकिन प्रभावशाली कहानी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। इसी कारण छोटे बजट की फिल्में भी बड़े स्तर पर सराहना पा रही हैं।
संजय मिश्रा ने फिल्म निर्माताओं और लेखकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे ऐसी कहानियों पर काम करें जो समाज से जुड़ाव महसूस करवाए। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा की ताकत उसकी विविधता, संस्कृति और मानवीय भावनाओं में है।
फिल्म विश्लेषकों का भी मानना है कि आज का दर्शक सामग्री-प्रधान फिल्मों को पसंद कर रहा है, और संजय मिश्रा जैसे कलाकारों की सोच उद्योग को नई दिशा दे सकती है।








