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Wednesday, January 28, 2026
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Wedding Insurance: अपने खास दिन को दें इंश्‍योरेंस की सुरक्षा, जानें क्यों जरूरी है ये बीमा

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भारत में शादी एक त्योहार के रूप में मनाई जाती है। लोग इस दिन को खास बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं। शादी को शानदार बनाने के लिए कई लोग वेडिंग प्लानर को हायर करते हैं। वेडिंग प्लानर शादी के सारे इंतजाम कर देते हैं। वह शादी के फंक्शन से लेकर टॉप लेवल का खाना-पीना, महंगे उपहार आदि का इंतजाम कर देते हैं।हाल ही में कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने शादी को लेकर हैरान करने वाला आंकड़ा पेश किया है।

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इन आंकड़ों के अनुसार इस साल शादियों से करीब 4.25 लाख करोड़ रुपये का बिजनेस हुआ है। वित्तीय एक्सपर्ट का मानना है कि शादी केवल एक समारोह नहीं है बल्कि ये उभरते उद्योग के साथ भारी भरकम महत्वपूर्ण निवेश को भी दर्शाती हैं। ग्लोबल वेडिंग सर्विसेज मार्केट वर्ष 2020 में 160.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। ऐसे में साल 2030 तक यह मार्केट 414.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ये अनुमान साफ बता रहे हैं कि शादी अब एक बड़ा बिजनेस बन गया है।

आज बाजार में कई तरह के इंश्योरेंस मौजूद हैं। इन इंश्योरेंस में से एक वेडिंग इंश्योरेंस भी है। इस इंश्योरेंस में आप अपनी शादी को सिक्योर कर सकते हैं। शादी में अप्रत्याशित अनिश्चितताओं से बचाने के लिए कई लोग वेडिंग इंश्योरेंस करवाते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर शादी के समारोह में कोई दुर्घटना हो जाए या फिर मौके से वेंडर के गायब हो जाने पर यह इंश्योरेंस बड़ा काम आता है। वेडिंग इंश्योरेंस का प्रीमियम समारोह के आकार और सर्विस पर निर्भर करता है। अगर शादी की ज्यादा सर्विस को कवर किया जाता है तब प्रीमियम भी ज्यादा लगता है।

इसके आगे गौरव अरोड़ा ने कहा कि संभावित खरीदारों को कवरेज की सीमा और क्लेम दायर करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए प्रश्न पूछना चाहिए। किसी की शादी की योजना की खास बारीकियों के अनुसार नीति को तैयार करना भी महत्वपूर्ण है। चाहे वह एक एक्जॉटिक डेस्टिनेशन वेडिंग हो या क्लासिक समारोह, नीति को उनकी अनोखी सोच को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

वेडिंग इंश्योरेंस के दायरे में सब कुछ कवर नहीं किया जाता है। अगर शादी को लेकर अचानक माइंड चेंज, बजट ज्यादा होना और अन्य कोई पर्सनल फैसले को बाहर रखा जाता है। ऐसे में इंश्योरेंस ससे पहले नियमों को अच्छी तरह से पढ़ना और समझना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में बीमा कंपनियां लाभ देने से इनकार कर सकती हैं।

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