प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का विषय नहीं, बल्कि यह कर्तव्यों, अनुशासन और देश की एकता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के लिए नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों को भी समान रूप से निभाना होगा।
मोदी ने अपने संबोधन में कहा,
“स्वतंत्रता की वास्तविक शक्ति तभी दिखाई देती है, जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। अधिकार हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, लेकिन कर्तव्य हमें राष्ट्र की प्रगति से जोड़ते हैं।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देश तब आगे बढ़ता है जब हर नागरिक एकजुट होकर समाज और राष्ट्र के हित में योगदान देता है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से कर्तव्य-भाव और सकारात्मक सोच के साथ देश निर्माण में सक्रिय भागीदारी की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का भारत तेजी से बदल रहा है, और ऐसे समय में राष्ट्र की एकता और सामाजिक सामंजस्य ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने नागरिकों को याद दिलाया कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह संदेश नागरिकों को जिम्मेदारी, अनुशासन और एकजुटता की दिशा में प्रेरित करने वाला है, विशेषकर उस समय जब देश विकास के नए दौर की ओर बढ़ रहा है।








