सौर विकिरण (Solar Radiation) में अचानक बढ़ोतरी के कारण दुनिया के कई हिस्सों में विमानन संचालन प्रभावित हो रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर एयरबस A320 सीरीज़ के विमानों पर देखा गया है, जिनमें नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम पर अस्थायी गड़बड़ियां रिपोर्ट हुईं। भारत में भी इसका असर दिखा, जिसके चलते कुछ उड़ानें या तो रद्द हुईं या देरी से उड़ानी पड़ीं
एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तीव्र सौर विकिरण के कारण सैटेलाइट नेविगेशन, ऑटोपायलट सिग्नल्स और फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम में शॉर्ट-टर्म डिसरप्शन हो सकता है।GPS सिग्नल कमजोर होना , रेडियो संचार में शोर (Interference) , इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में अस्थायी रिसेट | यह स्थिति खासकर ऊँचाई पर उड़ान भरने वाले मध्य दूरी के विमानों में ज्यादा पाई गई है।
नागरिक विमानन सूत्रों के अनुसार—कुछ मेट्रो रूट्स पर 25–30 मिनट की देरी देखी गई। 2–3 उड़ानों को तकनीकी जांच के लिए रोकना पड़ा। कई एयरलाइंस ने A320 विमानों की प्री-फ्लाइट चेकिंग बढ़ा दी है।हालांकि DGCA ने स्पष्ट किया है कि कोई बड़ी सुरक्षा जोखिम नहीं है और विमानों को तभी उड़ाया गया जब वे पूरी तरह सुरक्षित पाए गए।
इंडिगो, एयर इंडिया और विस्तारा सहित प्रमुख एयरलाइंस ने यात्रियों को SMS व ईमेल के जरिए सूचित किया कि वैश्विक सौर गतिविधि के कारण उड़ानों में देरी संभव है।कई एयरलाइंस ने कहा है कि वे—नेविगेशन सिस्टम को रीयल-टाइम मॉनिटर कर रही हैं | बैकअप सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं | आवश्यक होने पर रूट बदल रही हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, सोलर रेडिएशन का असर तात्कालिक होता है और ज्यादातर सिस्टम में बिल्ट-इन सुरक्षा होती है।यात्री सिर्फ इन बातों का ध्यान रखें: फ्लाइट से पहले SMS/Email अपडेट जरूर चेक करें | हवाईअड्डे पर थोड़े समय का अतिरिक्त मार्जिन रखें | देरी की स्थिति में टिकट बदले जा सकते हैं अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि सोलर साइकिल के कारण आने वाले कुछ हफ्तों में ऐसी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे विमानन क्षेत्र में कुछ अंतराल पर व्यवधान होने की आशंका बनी रहेगी, लेकिन तकनीकी सतर्कता के चलते बड़े जोखिम की संभावना बेहद कम है।








