अगर आप समाज के गरीब और वंचितों के प्रति संवेदनशील हैं उनकी समस्याओं को सुनते हैं और समाधान के लिए काम करना चाहते हैं तो SPJIMR द्वार चलाये जाने वाले PGPDM की मदद से आप इस क्षेत्र में प्रोफेशनल तौर पर आगे बढ़ सकते हैं। यहां कम आय वाले योग्य उम्मीदवारों के लिए सीमित स्कॉलरशिप उपलब्ध हैं। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।
- SPJIMR के PGPDM से अब तक 22 बैच ग्रेजुएट हो चुके हैं
- 25वां बैच फरवरी 2025 में शुरू होने जा रहा है
सामाजिक बदलाव के लिए हर वर्ग के प्रति समर्पण जरूरी है, क्योंकि कोई भी समाज तब तक पूरी तरह से विकसित नहीं हो सकता, जब तक कि हर तबका एक समान रूप से प्रगति न करे। ऐसे में हमारे बीच ऐसे नायकों की आवश्यकता है, जो गरीब परिवारों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने से लेकर, उनके बच्चों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं दिलाने, कौशल विकास को बढ़ावा देने, महिलाओं, आदिवासियों और दलितों के सशक्तिकरण के लिए काम करने, मानव तस्करी रोकने, पर्यावरण को संरक्षित करने, और श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष जैसे मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करें।
छत्तीसगढ़ के दूर-दराज इलाके से आने वाले सतेन्द्र सिंह लिल्हारे, ”बस्तर से बाजार तक’ संस्था के को-फाउंडर और सीईओ हैं। उनकी संस्था आदिवासी किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए काम करती है। आदिवासी किसानों की फसलों का बाजार तक न पहुंचना एक बड़ी समस्या थी, जिसका समाधान बस्तर से बाजार तक ने निकाला। उनकी इस पहल ने हजारों आदिवासी किसानों के जीवन को बदल दिया है। सतेन्द्र की इस पहल को Tata Social Enterprise Challenge (2020-21) में भी मान्यता मिली है। इसी तरह, ‘पूर्णता’ संस्था के फाउंडर आबू वर्गीज ने मानव तस्करी को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में बच्चों की तस्करी को रोकने के साथ-साथ सामुदायिक जागरूकता भी फैलाई गई है।







