पश्चिम बंगाल की सत्ता में आते ही नई भाजपा सरकार ने एक्शन मोड में काम करना शुरू कर दिया है। बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने ‘नबान्न’ में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के साथ अपनी पहली अहम बैठक की। इस बैठक में राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर करीब एक दर्जन सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने पुलिस को साफ निर्देश दिया है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर बजने वाले लाउडस्पीकर की आवाज उस परिसर से बाहर नहीं जानी चाहिए। इसके साथ ही, विशेष अवसरों को छोड़कर प्रार्थना या नमाज के लिए सड़कों को जाम करने और आम लोगों को असुविधा पहुंचाने पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
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लाउडस्पीकर और सड़क जाम पर क्या हैं निर्देश?
बैठक में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा है कि कानून सभी के लिए एक है और इन नियमों को हर समुदाय पर समान रूप से लागू किया जाए। इस कदम का धर्मगुरुओं ने भी स्वागत किया है:
नाखोदा मस्जिद के ट्रस्टी नासिर इब्राहिम ने फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “एक कानून का पालन करने वाले नागरिक के तौर पर हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं कि किसी भी धार्मिक कार्यक्रम के चलते सड़कें जाम नहीं होनी चाहिए। कानून बिना किसी भेदभाव या चुनिंदा रवैये के सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।”
सर्व भारतीय प्राच्य अकादमी के प्रिंसिपल जयंत कुषारी ने इसे सही ठहराते हुए कहा, “सभ्य समाज में ऐसा ही होना चाहिए। प्रार्थना एक व्यक्तिगत और आध्यात्मिक विषय है। मेरी जानकारी में किसी भी धर्म का शास्त्र आस्था के नाम पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को अनिवार्य नहीं बताता है। धर्म को नागरिक जिम्मेदारियों और दूसरों के अधिकारों के सम्मान के साथ तालमेल बिठाकर चलना चाहिए।”
महिला सुरक्षा और चुनाव बाद की हिंसा पर जीरो टॉलरेंस
नई सरकार ने महिला सुरक्षा और राज्य में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा, गुंडागर्दी व रंगदारी पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का सख्त निर्देश दिया है।
महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध, खासकर 2021 और 2024 के चुनाव के बाद दर्ज हुए रेप, रेप के प्रयास और छेड़छाड़ के मामलों को फिर से खोला जाएगा। वर्तमान में चुनाव के बाद हुई हिंसा के 1,300 से अधिक मामले जांच के दायरे में हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर 2021 की हिंसा की उन शिकायतों की भी फिर से जांच होगी जो केवल जनरल डायरी (GD) में दर्ज की गई थीं।
पुलिस को अवैध हथियारों की बरामदगी तेज करने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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गोतस्करी, अवैध खनन और ट्रैफिक को लेकर भी कड़े फैसले
इस अहम बैठक में डीजीपी एस.एन. गुप्ता, एडीजी (कानून-व्यवस्था) अजय रानाडे और कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद मौजूद रहे। इस दौरान कई अन्य सख्त फैसले भी लिए गए:
अवैध खनन: बीजेपी के चुनावी वादे के मुताबिक सिंडिकेट राज खत्म करने और अवैध कोयला, बालू और पत्थर खनन पर पुलिस को पूरी तरह से रोक लगाने को कहा गया है।
पशु तस्करी व बूचड़खाने: पशु तस्करी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 14 साल से अधिक उम्र के मवेशियों का परिवहन सिर्फ एक पशु चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में ही किया जाएगा। साथ ही राज्य में अवैध बूचड़खानों को चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रैफिक और वीआईपी कल्चर: मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा पर जोर देते हुए हेलमेट नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा है। इसके अलावा, सीएम ने खुद के काफिले की आवाजाही के दौरान आम जनता को कम से कम असुविधा देने और बेवजह हूटर्स न बजाने के निर्देश दिए हैं।
अवैध टोल और सुरक्षा: सड़कों पर अवैध टोल टैक्स की वसूली किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा, चुनाव आयोग के पुराने फैसले को आगे बढ़ाते हुए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की सुरक्षा वापस लेने का निर्देश भी दिया गया है।




